पाकिस्तानकी धर्मनिरपेक्षताका ढोंग, ९० प्रतिशत हिन्दू छोड चुके हैं देश, ९५ प्रतिशत देवालय हुए नष्ट !!


नवम्बर २८, २०१८

पाकिस्तान विश्वमें एक मुस्लिम बहुल व आतंकी देशके रूपमें जाना जाता है । आज यहां ‘करतारपुर कॉरिडोर’का शिलान्यास समारोह आयोजित किया जा रहा है । इसे धर्मके प्रकरणमें पाकिस्तानकी नरमीके रूपमें देखा जा रहा है, किन्तु इस देशमें हिन्दुओंकी विकट स्थितिपर आए दिन समाचार आते रहते हैं । वर्तमानमें यहां हिन्दू धर्मका अनुसरण करने वालोंकी संख्या कुल जनसंख्याका १.६ प्रतिशत ही है अर्थात ३६ लाख ।


जहां भारतमें अल्पसंख्यकोंको आरक्षणके अतिरिक्त भी अन्य सुविधाएं दी जाती हैं, वहीं पाकिस्तानमें हिन्दुओंकी सुरक्षाको लेकर कोई ध्यान नहीं जाता । यहां आए दिन हिन्दुओंपर अत्याचार किए जाते हैं, उनके घरोंको लूटा जाता है । वहीं यदि उनके धार्मिक स्थलोंकी बात करें तो वह भी सुरक्षित नहीं हैं ! यहां कई हिन्दू धार्मिक स्थलोंपर आक्रमण किए जाते हैं और जब परिवाद प्रविष्ट की जाती हैं, तो उनकी कोई सुनवाई नहीं होती !

मानवाधिकार संगठनोंका कहना है कि गत ५० वर्षोंमें पाकिस्तानमें रह रहे ९० प्रतिशत हिन्दू देश छोड चुके हैं ! धीरे-धीरे उनके पूजा स्थल और मन्दिर भी नष्ट किए जा रहे हैं ! हिन्दुओंकी सम्पत्तिपर बलात अधिकारके कई प्रकरण सामने आ रहे हैं ।

हाल ही में एक महिला प्रोफेसरने वीडियो संदेशकेद्वारा आरोप लगाया है कि पाकिस्तानमें अल्पसंख्यक हिन्दू कुप्रबन्धन और अराजकताका सामना कर रहे हैं । उन्होंने अपने वीडियो सन्देशमें कहा है कि भू-माफियाओंने सिन्धके विभिन्न क्षेत्रोंमें अपनी जडे सशक्त कर ली हैं और लाडकानामें हिन्दुओंको उनकी सम्पत्तिको लूट रहे हैं !

उन्होंने कहा है कि सिन्धके भू-माफिया हिन्दुओंकी सम्पत्तिको छीननेके लिए झूठे ‘पावर ऑफ अटॉर्नी’ बनाकर उनकी भूमिपर अधिकार कर रहे हैं । हिन्दुओंके धनोंपर अधिकार करके वो उन्हें चुप रहनेकी चेतावनी दे रहे हैं । इससे परेशान लाडकानाके कई हिन्दू अपनी सम्पत्तियोंको विक्रय कर जानेके लिए तैयार बैठे हैं । इनमेंसे कई तो ऐसे हैं, जो देश छोडकर, अपनी सम्पत्तियोंको छोडकर जाना नहीं चाहते, किन्तु वो विवशतामें रो-धोकर अपनी भूमिको विक्रय कर दूसरे देशोंमें जा रहे हैं । सिन्धके अधिकारी भी इसके विरुद्घ कुछ नहीं बोल रहे हैं ।

‘एक्सप्रेस ट्रिब्यून’के विवरणके अनुसार वर्ष २०१४ के अंक-विवरणमें सामने आया है कि यहां ९५ प्रतिशत हिन्दू मन्दिरोंको नष्ट किया जा चुका है ! वर्ष १९९० के पश्चात अल्पसंख्यकोंके ४२८ पूजा स्थलोंमेंसे ४०८ को नष्ट कर, वहां समाधि, शौचायल, टॉय स्टोर, रेस्टोरेंट, सरकारी कार्यालय और विद्यालय आदि बनाए गए हैं ! केवल २० ही पूजा स्थल ऐसे हैं जहां पूजाकी जा रही है ! यदि कहीं कोई मन्दिर बचे भी हैं तो उनतक पहुंचनेके रास्ते बंद कर दिए गए हैं, ताकि वहां कोई पूजा करने न जा सके ।

‘एक्सप्रेस ट्रिब्यून’के एक विवरणके अनुसार डेरा इस्माइल खानमें स्थित काली बाडी हिन्दू मन्दिरको एक मुस्लिमको किराए पर दिया गया है । वो लोग उसका एक ताज होटलके रूपमें प्रयोग कर रहे हैं ! यदि हिन्दुओंमें किसीकी मृत्यु हो जाती है तो उन्हें मृतकको अन्तिम संस्कारके लिए जलाने नहीं देते ! उन्हें मृतकको भूमिमें गाडनेको विवश किया जाता है !

पाकिस्तानके कराचीमें स्थित वरुण मन्दिरको अब शौचालयके रूपमें प्रयोग किया जा रहा है !! यह मन्दिर लगभग १००० वर्ष प्राचीन है । यह मन्दिर पूरे भारतीय उपमहाद्वीपमें सबसे पुराना और हिन्दू देवताको समर्पित मन्दिर है ।

यह मन्दिर पाकिस्तानके लिए एक ऐतिहासिक धरोहर होनी चाहिए, किन्तु ऐसा नहीं हो रहा है । ‘डेली टाइम्स’के वर्ष २००८ में आए एक विवरणमें कहा गया है कि मन्दिरका एक भाग शौचालयके रूपमें प्रयोग किया जा रहा है । यहां वर्ष १९५० में हिन्दुओंने अन्तिम बार लाल साईं वरुण देवका त्योहार मनाया था । मन्दिरकी देखरेख करने वाले जीवरीजका कहना है कि अल्पसंख्यकोंके अधिकारोंका यहां कोई सम्मान नहीं किया जाता । बादमें जब ये समाचार विश्वमें फैला तो मन्दिरकी पुनर्वासके समाचार सामने आएं ।

किसी समयमें पाकिस्तानके प्रांत खैबर पख्तूनख्वा जनपदके कर्कमें एक छोटेसे गांव टेरीमें कृष्ण द्वार नामका मन्दिर हुआ करता था । आज इस स्थानपर समाधि बन चुकी है । यहां मन्दिरका कोई चिह्न नहीं बचा है । यह स्थान चारों ओरसे मकानसे घिरा है और यहां पहुंचनेके रास्ते भी बंद हैं ।

पाकिस्तानमें केवल हिन्दू मन्दिरोंको नष्ट कर उनके स्थानपर अन्य गतिविधियां ही नहीं बढाई जा रहीं, बल्कि उनपर आक्रमण भी हो रहे हैं । आए दिन इन मन्दिरोंपर आक्रमण किए जाते हैं । जिसका लक्ष्य भी हिन्दू ही बनते हैं । ऐसा ही एक प्रकरण २८ मार्च, २०१४ का है । उस दिन पाकिस्तानके हैदराबादके एक व्यापारिक क्षेत्र फतेह चौकके प्रसिद्ध हिन्दू मन्दिरमें तीन धर्मान्धोंने आक्रमण किया था । इस मन्दिरमें पेट्रोल फेंककर आग लगाई गई थी !

इसके अतिरिक्त सिंधमें भी एक हिन्दू मन्दिरपर आक्रमण हुआ था, किन्तु वह घटना दो व्यक्तियोंकी निजी रंजिशका परिणाम बताई गई । इन घटनाओंके पश्चात हिन्दुओंने विरोध प्रदर्शन भी किए ।

पाकिस्तान हिन्दू काउंसिलके अनुसार इस समय देशभरमें सभी धार्मिक अल्पसंख्यकोंके ऐसे १४०० से अधिक पवित्र स्थान हैं, जिन तक उनकी पहुंच नहीं है । अथवा इन्हें समाप्त कर दुकानें, खाद्य गोदाम और पशु बाडोंमें परिवर्तित किया जा चुका है ।

एबटाबादमें गुरुद्वारा गली कभी सिखोंके लिए तीर्थ स्थल हुआ करती थी, किन्तु अब यहां कपडोंकी दुकानें खुल गई हैं । वहीं पेशावरमें स्थित ऐतिहासिक हिन्दू मन्दिरको अब विद्यालयमें बदल दिया गया है । इस्लामाबादमें स्थित राम कुण्ड मन्दिरको दर्शनीय व सैर-सपाटेके लिए बनाया गया है !

 

“स्वतन्त्रताके संघर्षके अन्तरालमें राजनेताओंके व तथाकथित महात्माओंके षडयन्त्रका परिणाम आज हिन्दू भोग रहे हैं और ये प्रकरण पाकिस्तान शासनकी तथाकथित धर्मनिरपेक्षताके ढोंगको भी उजागर करता है ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

 

स्रोत : अमर उजाला



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