एनजीटीका हिन्दूद्रोह, मथुरामें अतिक्रमणके नामपर देवालयोंको तोडनेका दिया था आदेश, विद्रोहके पश्चात अब पुनः खुलेंगे मन्दिरके द्वार


नवम्बर ३०, २०१८

उत्तर प्रदेशके मथुरामें देवालय प्रबन्धनद्वारा किया जा रहा विरोध प्रदर्शन समाप्त हो गया है । यह प्रदर्शन हरित प्राधिकरणद्वारा (एजीटी) दानघाटी मंदिरके भागको ढहानेका आदेश देनेके विरोधमें किया जा रहा था । एक अधिकारीने बताया कि गुरुवार, २९ नवम्बरको देर शाम जनपदके अधिकारियों और विरोध प्रदर्शन कर रहे पुजारियों व सेवायतोंके मध्य हुई बैठकने इस गतिरोधको तोडा और यह निर्णय लिया गया कि सभी देवालय शुक्रवारको खुलेंगे ।

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरणने (एनजीटी) बडे व व्यस्त सडकोंसे अतिक्रमण हटानेका आदेश दिया था, जिसके पश्चात इस निर्णयके विरोधमें गोवर्धनमें तनाव हो गया और दानघाटी व अन्य मन्दिर मंगलवारसे बंद थे ।
मन्दिरोंको बंद करनेके पश्चात हिन्दू नेता और धर्मगुरु सडकोंपर उतर आए और मथुराकी सांसद हेमा मालिनी और भारतीय जनता पार्टीके (भाजपा) विधायक व राज्य ऊर्जा मन्त्री श्रीकान्त शर्माको इस प्रकरणको रोकनेमें असफल रहनेपर लक्ष्य बनाया ।

सरकार विरोधी नारेबाजीके चलते प्रशासनको अतिक्रमण ढहानेके कार्यको रोकना पडा । जिला मजिस्ट्रेट सर्वज्ञ राम मिश्राको लोगोंके भयको दूर करना पडा कि अब किसी और मन्दिरके ढांचेको नहीं ध्वस्त किया जाएगा ।

उन्होंने कहा कि हमने एनजीटीके आदेशपर दानघाटी मन्दिरके सामने केवल अवैध ढांचे गिराए हैं । दानघाटी मन्दिरके पुजारी रामेश्वर पुरोहितने कहा कि मन्दिर खोलनेका निर्णय दर्शनके लिए आने वाले सैकडों श्रद्धालुओंकी भावनाको ध्यानमें रखते हुए लिया गया है ।

 

“देशमें सहस्रों मस्जिदें हैं, जो अतिक्रमणके नामपर आज भी है और उनसे ध्वनिप्रदूषण भी काफी अधिक होता हैं तो कभी हरित प्राधिकरणका ध्यान कभी वहां क्यो नहीं गया ? क्या सभी शासकीय और अशासकीय संस्थाएं केवल हिन्दू विरुद्घ ही है ? यह अवश्य विचारणीय है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : जी न्यूज



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