नवम्बर ३०, २०१८
उत्तर प्रदेशके मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथके भगवान हनुमानको दलित बतानेके पश्चात राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोगके (एनसीएसटी) अध्यक्ष नन्द कुमार सायने दावा किया है कि वह आदिवासी थे ! लखनऊमें एक कार्यक्रमके मध्य सायने कहा, ”मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि लोग सोचते हैं कि भगवान रामकी सेनामें वानर, भालू, गिद्ध थे । ओरांव आदिवासीसे सम्बन्धित लोगोंद्वारा बोली जाने वाली कुरुख भाषामें ‘टिग्गा’का (एक गोत्र है यह) अर्थ वानर होता है । कंवार आदिवासियोंमें, जिनसे मेरा सम्बन्ध है, एक गोत्र है, जिसे हनुमान कहा जाता है ।
उन्होंने कहा, ”इसी प्रकार, गिद्ध कई अनुसूचित जनजातियोंमें एक गोत्र है । अतएव मेरा मानना है कि वे आदिवासी समुदायसे थे और उन्होंने इस बडी लडाईमें भगवान रामका साथ दिया । इससे पूर्व योगीने मंगलवारको राजस्थानके अलवर जनपदमें एक रैलीको सम्बोधित करते हुए कहा था, ”हनुमान वनवासी, वंचित और दलित थे । बजरंग बलिने उत्तरसे दक्षिण तक और पूर्वसे पश्चिम तक सभी भारतीय समुदायोंको एकत्रित रखनेका कार्य किया ।
“धर्माभिमुख समाज ही देवी-देवताओंकी ऐसी विडम्बना कर सकता है और जब समाज धर्माभिमुख होता है तो अधर्मसे प्रेरित होकर स्वतः ही खण्ड-खण्ड होकर विनाशकी ओर अग्रसर हो जाता है । इस विनाशको रोकने हेतु अब हिन्दू राष्ट्र व धर्मशिक्षण ही एकमात्र पर्याय है”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान
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