नवम्बर ३०, २०१८
विश्व वेदांत संस्थानने राम मन्दिर निमार्णके प्रकरणपर प्रश्न किया है कि यदि ईशा मसीह, मदर मैरी और अल्लाहसे सम्बन्धित प्रकरण न्यायालय नहीं ले जाए जा सकते और न्यायालय उन्हें निर्धारित नहीं कर सकता तो भगवान रामको न्यायालय लेकर क्यों गए ?
विश्व वेदांत संस्थानने शुक्रवार, ३० नवम्बरको कहा कि बिना किसी बाधाके राम मन्दिर निमार्णके लिए अयोध्यामें कलयुगका प्रथम अश्वमेध यज्ञ १ से ४ दिसम्बर तक किया जाएगा ।
विश्व वेदांत संस्थानके संस्थापक आनंदजी महाराजने यहां एक सम्वाददाता सम्मेलनमें कहा, “अब श्रीराम मन्दिर निमार्णके आन्दोलनको जन आन्दोलन बननेसे कोई रोक नहीं सकता । अयोध्यामें राम मंदिर बनकर रहेगा ! जब सर्वोच्च न्यायालय कुछ प्रकरणमें रातमें अपना निर्णय सुना सकता है तो राममंदिरमें देर क्यों हो रही है ? यदि ऐसे ही चलता रहा तो रामजन्म भूमिमें भी मोदी सरकारको अध्यादेश लाना ही होगा । अब मोदीजीको मंदिर निर्माणकी तिथि बतानी होगी । सन्त और रामभक्त मंदिर निर्माणके लिए सज्ज है ।”
आनन्दजी महाराजने कहा कि भारतकी कथित धर्मनिरपेक्ष दल भगवानपर आस्था नहीं रखते हैं ः भाजपा आस्था तो रखती है, परन्तु मन्दिर बनवानेके प्रकरणमें ऊहापोहमें है; इसीलिए इस अश्वमेध यज्ञको १००८ पण्डित मिलकर पूरा करेंगे और ११००० सन्त सम्मिलित होंगे । साधु-सन्त और भारतकी जनता इसके लिए कमर कस चुकी है ।
उन्होंने कहा कि त्रेता युगके पश्चात कलयुगमें प्रथम बार अयोध्याकी पवित्र भूमि पर, जहां भगवान श्रीरामने जन्म लिया था, अश्वमेध यज्ञ होने जा रहा है । विश्व वेदान्त संस्थान सभी सन्तोंको जोडकर राम मन्दिरका निर्माण करेगा ।
विश्व वेदांत संस्थानके संस्थापकने कहा, “राममन्दिर निर्माणके लिए न्यायालयके आदेशकी प्रतिक्षा नहीं की जा सकती है । सन्तोंको भव्य राम मन्दिर निर्माणका बीडा उठाना होगा । मन्दिरका विषय राष्ट्रीय अस्मितासे जुडा है । हमारे देशमें विभिन्न मत या सम्प्रदायके लोग रहते हैं, परन्तु सबके भगवान श्री राम ही पूर्वज हैं । प्रत्येक हिन्दूको अपने पूर्वज भगवान श्रीरामके भव्य मन्दिरके निर्माणको अपना भरपूर समर्थन देना चाहिए ।”
महायज्ञके संयोजक स्वामी आनन्दजी महाराजने बताया कि विश्व वेदान्त संस्थानका केन्द्र नीदरलैण्डमें है । भारतके २१ प्रदेशमें लगभग १० लाख सदस्य अबतक संस्थानसे जुड चुके हैं । उन्होंने कहा कि राम मंदिरका निर्माण संतोंके आदेश और निर्देशनमें ही होगा ।
“हिन्दू द्रोही लोकतन्त्र व संविधानमें वर्णित तथाकथित धर्मनिरपेक्षताने आज हिन्दुओंकी इतनी दुर्गति की है कि जिन निर्णयोंके लिए आदि गुरु शंकराचार्यने मठोंकी स्थापना की थी, आज वे निर्णय, जिन्हें धर्मका ज्ञान नहीं वे लेते हैं ! इसीको परिवर्तन करनेके लिए हिन्दू राष्ट्र आवश्यक है ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान
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