दिसम्बर ३, २०१८
प्रायः विवादोंमें रहने वाली मुम्बईकी चर्चित धर्मगुरु राधे मांकी (सुखविंदर कौरकी) प्रयागराजमें लगने जा रहे कुम्भ मेलेसे पहले जूना अखाडेमें वापसी हो गई है ! जानकारीके अनुसार, भक्तोंकी गोदमें बैठकर नृत्य करनेके प्रकरणमें राधे मांने लिखितमें क्षमा मांगी है और भविष्यमें पुनः ऐसा नहीं करनेकी बात कही है । इसी आधारपर जूना अखाडेमें उनका पुनः प्रवेश हुआ है ।
जूना अखाडेने न केवल राधे मांका निलम्बन रद्द कर उन्हें बहाल कर दिया है, बल्कि उनकी महामण्डलेश्वरकी पदवी भी वापस कर दी है ! अखाडेमें आने और महामण्डलेश्वरकी पदवी वापस होनेके पश्चात राधे मां अब न केवल इसी माहकी २५ को प्रयागराज कुम्भ मेलेमें होने वाले जूना अखाडेकीमें सम्मिलित हो सकेंगी, बल्कि कुम्भके तीनों शाही स्नानमें भी अखाडेमें होंगी ।
जूना अखाडेने कुम्भमें महामण्डलेश्वरके रूपमें राधे मांको भूमि और दूसरी सुविधाएं भी उपलब्ध करानेका निर्णय लिया है । यह सब इसलिए विचित्र है; क्योंकि गत वर्ष अखाडा परिषदने उनका नाम फर्जी बाबाओंकी सूचिमें डाला था !
यह घोषणा करने वाले महंत हरिगिरिने बताया कि राधे मांके विरुद्घ अखाडेकी कई दलोंने जांच की थी, परन्तु किसीमें भी उनके विरुद्घ कोई गम्भीर आरोप नहीं पाए गए । इतना ही नहीं उनके विरुद्घ कोई आपराधिक अभियोग भी अब नहीं है ।
राधे मांकी भांति अब पायलट बाबा भी कुम्भ मेलेमें जूना अखाडेकी पेशवाई व शाही स्नानका भाग बनेंगे । उन्हें भी अखाडेसे भूमि व दूसरी सुविधाएं मिलेंगी ।
पायलट बाबाने भी अखाडेसे लिखित रूपमें क्षमा मांगी थी । हरिद्वारमें पायलट बाबाके जुलूसमें भगदड मच गई थी, जबकि प्रयागराजके कुम्भमें उन्होंने महामण्डलेश्वरोंकी परिषद बनानेकी प्राथमिकता कर अखाडेको क्रोधित किया था ।
“आदिगुरु शंकराचार्यद्वारा पुनर्जीवित, स्वयं ईश्वरद्वारा संरक्षित सनातन हिन्दू धर्मकी ऐसी दुर्गति देख मन क्रन्दन करता है; आज न ही किसीको वास्तविक सन्तका संज्ञान होता है और महामण्डलेश्वर जैसी पदवीका कैसे उपहास किया जाता है; अतः अब धर्मराज्यकी स्थापना अत्यावश्यक है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : नभाटा
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