जब पितृदोष निवारणार्थ दत्तात्रेय देवताका श्री गुरुदेव दत्त जपनेके लिए कहते हैं तो वे पूछते हैं कि ये कौनसे देवता हैं और इनका जप क्यों करें ?, सभीको इनके विषयमें जानकारी हो और इनका जप करते समय श्रद्धामें वृद्धि हो, इस हेतु यह लेख श्रृंखला आरम्भ कर रही हूं !
कुछ लोग अज्ञानतावश कहते हैं कि भगवान दत्तात्रेय महाराष्ट्रके देवता हैं; किन्तु यदि वे स्थान देवता या ग्राम देवता होते तो क्या आद्य गुरु शंकराचार्य उनकी इसप्रकार वंदना करते ?, किंचित सोचें ?
“आदौ ब्रह्मा मध्ये विष्णुरन्ते देवः सदाशिवः
मूर्तित्रयस्वरूपाय दत्तात्रेयाय नमोस्तु ते।
ब्रह्मज्ञानमयी मुद्रा वस्त्रे चाकाशभूतले
प्रज्ञानघनबोधाय दत्तात्रेयाय नमोस्तु ते ।।” – आद्यगुरु शंकराचार्य
अर्थ : “जो आदिमें ब्रह्मा, मध्यमें विष्णु तथा अन्तमें सदाशिव हैं, उन भगवान दत्तात्रेयको बारम्बार नमस्कार है । ब्रह्मज्ञान जिनकी मुद्रा है, आकाश और भूतल जिनके वस्त्र हैं तथा जो साकार प्रज्ञानघन स्वरूप हैं, उन भगवान दत्तात्रेयको बारम्बार नमस्कार है।”
उनमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनोंका तत्त्व विराजमान होनेके कारण उन्हें त्रिदेव भी कहा जाता है ! – तनुजा ठाकुर
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