दिसम्बर १२, २०१८
“यदि अहमद एक मुस्लिम है और वह विपणिमें (बाजारमें) रोहित, तुषार और मानवके (जो हिन्दू हैं) समक्ष एक गायको मारता है तो क्या अहमदने कोई अपराध किया है ?” यह प्रश्न गुरु गोबिंद सिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालयके लॉ छात्रोंसे तीसरी छमाहीकी (सेमेस्टरकी) परीक्षामें पूछा गया था । यह प्रश्न ७ दिसम्बरको आयोजित की गई ‘लॉ ऑफ क्राइम पेपर-१’में पूछा गया था । ३ घंटेकी ये परीक्षा कुल ७५ अंकोंकी थी, जिसमें २५ अंकका यह प्रश्न था ।
जैसे ही सामाजिक प्रसार माध्यमोंपर इसको साझा किया गया तो विश्वविद्यालयने इसपर खेद व्यक्त करते हुए इसे तुरन्त हटानेका निर्णय किया । साथ ही कहा गया छात्र इस प्रश्नका उत्तर नहीं देंगे ।
बता दें, देहलीके शिक्षा मन्त्री मनीष सिसोदियाको जैसेकी इस बातका संज्ञान हुआ तो उन्होंने प्रकरणकी जांचका आदेश दे दिए । साथ ही उन्होंने अपना क्रोध प्रकट करते हुए कहा, “ये विचित्र है, इसप्रकारके प्रश्न पूछे जानेसे ऐसा लग रहा है, जैसे समाजको परेशान किया जा रहा है, मैंने जांचके आदेश दे दिए हैं, जांच पूरी होने तक जैसे ही कोई सत्य सामने आता है तो उसके विरुद्ध कडी कार्यवाही की जाएगी ।”
उच्चतम न्यायालयके अधिवक्ता बिलाल अनवर खानने रविवार, ९ दिसम्बरकी रात्रि ट्विटरपर इस प्रश्नको साझा किया और लिखा, ये एक सामान्य प्रश्न, एक सम्पूर्ण समुदायको अमानवीय बनाना है । ये प्रश्न नरेलाके लॉ कॉलेजमें आयोजित परीक्षाके तृतीय छमाहीमें पूछा गया है ।
वहीं खानने आगे लिखा, इस प्रकरणके बारेमें विश्वविद्यालय और महाविद्यालयको लिखा था, किन्तु अभी तक उत्तर नहीं आया । अपने ईमेलमें उन्होंने लिखा, “जो प्रश्न पूछा गया है, वह विशेष रूपसे वर्ग और समुदायके विरुद्ध है ।”
सीपीजे महाविद्यालयमें ‘स्कूल ऑफ लॉ’के प्रधानाचार्य नीता बेरीका कहा है कि विश्वविद्यालयने प्रश्न-पत्र बनाया था, मैं अवकाशपर थी और परीक्षासे आए प्रश्नोंके बारे कोई जानकारी नहीं है । वहीं उन्होंने आगे कहा, “मुझे नहीं लगता है कि इस प्रश्नके विरुद्ध विरोध करनेकी आवश्यकता है, क्योंकि ये एक ‘लॉ’का प्रश्न है और इसमें कोई भी स्थिति उत्पन्न हो सकती है और न्यायालयसे इसके बारेमें निर्णय लेनेके लिए कहा जा सकता है ।
‘इंडियन एक्सप्रेस’के अनुसार जीजीएसआईपीयू लिपिक सतनाम सिंहने कहा, “विश्वविद्यालयने गायपर पूछे गए प्रश्नपर खेद व्यक्त किया है । इस प्रश्नको आप किसी भी धर्मसे जोड नहीं कर सकते । यद्यपि ये बुरा प्रश्न है, हमें इसपर खेद है और अभी तक प्रश्न हटा दिया गया है । वहीं इसपर कोई अंक भी नहीं है ।
“क्या परीक्षामें प्रश्न परिवर्तन करनेसे सत्य परिवर्तित होगा ? सत्यसे मुख मोडनेसे सत्य परिवर्तित नहीं होता है और धर्मान्धोंद्वारा की जाने वाली गौहत्या भी समाजका एक कटुसत्य है, जिसे भाई चारे और आपसी सौहार्दका चोला पहना ढकनेका प्रयास किया जा रहा है ! और इसी धर्मनिरपेक्ष प्रयासके कारण हिन्दुओंकी दुर्गति हुई है ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : आजतक
Leave a Reply