दिसम्बर १६, २०१८
सिटी कोतवाली थाना क्षेत्रमें गोपालपुरा गांवके पास शनिवार, १५ दिसम्बरको प्रातः ४ बजे मवेशियोंसे भरा ट्राॅला अनियन्त्रित होकर पलटनेसे उसमें लदे २० मवेशियोंकी मृत्यु हो गई ! घटनाके समय ट्रकके पीछे पुलिसकी गाडी थी । पुलिसके सामने ही घटना हुई । इसके पश्चात भी अवैध रूपसे गायोंकी तस्करी करने वाले आरोपी भाग गए । इसमें राजनगर टीआई और कोतवाली टीआईके वक्तव्य भिन्न-भिन्न हैं । यद्यपि, दोनों ही टीआई घटनाके समय पुलिस उपस्थित होनेकी बात स्वीकार कर रहे हैं ।
यह वाहन गायोंको लादकर उत्तर प्रदेशकी ओर ले जा रहा था । सूचना मिलनेपर राजनगर थाना पुलिसने इस वाहनको पकडनेके लिए निकली । पुलिस वाहनको पीछे आता देख ट्राॅला चालकने वाहनको तीव्र गतिसे भगाया । वाहनको पुलिससे बचानेके प्रयासमें ट्रॉला गोपालपुरा गांवके पास बने सत्य साईं सत्संग आश्रमके निकटके मोडपर अनियन्त्रित होकर पटल गया । वाहन पलटनेसे उसमें सवार १२ गायों और ८ बछडों सहित २० मवेशियोंकी मृत्यु हो गई ।
घटनाकी सूचना मिलते ही सीएसपी आरआर साहू, कोतवाली टीआई संधीर सिंह चौधरी, सिविल लाइन टीआई विनायक शुक्ला वहां पहुंचे । यहां पहुंचे पुलिस बलने इन मृत जानवरोंको नगर पालिकाके वाहनसे उठवाया और सरानी गांवके पास दबा दिया । सभी आरोपियोंके भाग जानेके पश्चात राजनगर पुलिस थाने पहुंची और अज्ञात आरोपियोंपर प्रकरण प्रविष्ट किया ।
जनपदकी सीमासे लगे उत्तरप्रदेशके महोबा, बांदा और कानपुरमें मवेशियोंको क्रय करनेके लिए मण्डियां लगती हैं । इन्हीं मण्डियोंके लिए मध्यप्रदेशसे जानवरोंकी तस्करी करके ले जाया जाता है । जनपदमें सागर कानपुर राष्ट्रीय राजमार्गपर कैमाहामें आरटीओ, वाणिज्यकर, वन विभाग और पुलिसके चेक पोस्ट हैं । इनसे बचनेके लिए ही तस्कर राजमार्गके स्थानपर राजनगरसे लवकुशनगर होकर सीधी महोबा जानेका प्रयास करते हैं ।
गत दो माह पूर्व ही कई बार मवेशियोंसे भरे ट्रकोंको पकडा गया है । १२ अक्टूबर २०११ को १९ भैंसोंसे भरा ट्रक और ३ अरोपी ओरछा रोड थाना पुलिसने पकडा था । इसी प्रकार १४ अक्टूबरको २१ भैसोंसे भार ट्रक बडामलहरा पुलिसने पकडा, वाहनका कर्मी भाग गया था ।
“गौहत्या रोकने हेतु प्रशासन व पुलिसके सभी दावे सदैव ही निराधार सिद्ध हुए प्रतीत होते हैं, इससे ज्ञात होता है कि धर्मरक्षाके प्रति हम कितने उदासीन हो चुके हैं ! वस्तुतः इस उदासीनताका कारण धर्माभिमानका अभाव है, जो हिन्दुओंको सिखायख ही नहीं जाता हैं ! अतः अब धर्मराज्यकी स्थापना कर ही धर्मरक्षण सम्भव है”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : भास्कर
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