वाराणसीमें खुदाईमें निकले शिवलिंगोंका अपमान, प्रशासनने नाले किनारे फेंका !!!


दिसम्बर २०, २०१८

उत्तर प्रदेशके वाराणसीमें काशी विश्वनाथ कॉरिडोरके लिए चल रहे कार्यके मध्य निकले सैंकडों शिवलिंगोंको नाले किनारे फेंकनेका प्रकरण सामने आया है !!

सूचनाके अनुसार, लंका थानाक्षेत्रके रोहित नगर कॉलोनीमें रिक्त स्थानके मलबेमें बुधवार, १९ दिसम्बरको सौसे अधिक शिवलिंग मिले ! यह स्थान असि नदीसे (अब नाला) सटा है । बुधवार प्रातः जैसे ही नाले किनारे शिवलिंग फेंकनेका समाचार मिला, स्थानीय लोग वहां एकत्र हो गए । वहां उपस्थित लोगोंने इसका वीडियाे बना सामाजिक प्रसार माध्यमपर साझा कर दिया ।

ऐसेमें दोपहर लगभग एक बजे ‘मन्दिर बचाओ अभियान’के संरक्षक स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती बटुकों व विद्यार्थियोंके साथ तथा कांग्रेसके पूर्व विधायक अजय राय पार्टी कार्यकर्ताओंके साथ पहुंचे । इनके पहुंचनेके पश्चात पुन: मलबेको खंगाला जाने लगा । लगभग एक घण्टेमें दो दर्जनसे अधिक छोटे-बडे शिवलिंग मलबेसे लोगोंने निकाले ।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्दने वहींपर ही उन शिवलिंगोंका पूजन-अर्चन किया । वहीं कांग्रेस कार्यकर्ता वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियोंको बुलानेकी मांग करते हुए नारे लगाने लगे । विरोध बढनेपर पुलिसने धारा २९५, १५३ बी और ४२७ के अन्तर्गत प्रकरण प्रविष्ट किया है ।

पुलिसने कहा, “हम इस बातकी जांच करेंगे कि इतनी संख्यामें यहां शिवलिंग कहांसे आए ? इसे यहां लाकर किसने फेंका है ? दोषियोंके विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी ।” वहीं, कांग्रेस नेता अजय राजने भाजपापर लक्ष्य साधते हुए कहा, “धर्मके नामपर बने शासनका वास्तविक रूप जनताके समक्ष आ गया है । धर्मके नामपर वोट लेने वाले शासनमें शिवलिंग नाले किनारे फेंके हुए मिले ! इससे और दुखद स्थिति क्या हो सकती है ? योगीको जनता कभी क्षा नहीं करेगी ।”

‘मंदिर बचाओ अभियान’के संचालक स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्दने कहा, “यह शासन विश्वनाथ कॉरिडोरके लिए प्राचीन मन्दिरोंको तोडनेका काम कर रही है । पहले मुझे इस बातकी आशंका थी, जो अब सही सिद्ध होती दिख रही है । यह धार्मिक प्रकरण है । मन्दिरों शको तोडना और विग्रहोंको नष्ट करना जघन्य अपराध है । इसके लिए किसीको क्षमा नहीं किया जा सकता ।” वहीं, सपा नेता प्रकरणको हटानेके लिए पुलिसपर शिवलिंग हटानेका आरोप लगाया !

 

“यदि कॉरिडोरका निर्माण करना ही था तो योग्य था कि मार्गमें आने वाले प्राचीन देवालयोंकी प्रतिमाओंकी पुनर्स्थापना की जाती, परन्तु ऐसा न करके उन्हें नालेके समीप कूडेके ढेरमें फेंक दिया गया, यह हिन्दुओंके लिए लज्जाका विषय है ! हमारा धर्माभिमान मृतप्राय हो चुका है,  जो हम धर्मकी ऐसी विडम्बना होते देख रहे हैं और मौन हैं ! धर्म व देवताओंकी ऐसी विडम्बना कोई हिन्दुवादी शासन कैसे कर सकता है, यह प्रश्न प्रत्येक हिन्दूको क्षुब्ध कर रहा है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : कोहराम



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