भारतने ‘जिन्ना हाऊस’पर पाकिस्तानके दावेको नकारा !!


दिसम्बर २१, २०१८

भारतने मुम्बईमें ‘जिन्ना हाऊस’के स्वामित्वपर पाकिस्तानके दावेको गुरुवार, २० दिसम्बर दृढतासे अस्वीकृत कर दिया । साथ ही कहा कि यह भारतकी सम्पत्ति है !

विदेश मन्त्रालयके प्रवक्ता रवीश कुमारने कहा कि जहां तक इस सम्पत्तिकी बात है तो पाकिस्तानका कोई पक्ष ही नहीं बनता है । यह भारत शासनकी सम्पत्ति है और हम उसके सौंदर्यीकरणमें जुटे हैं । मुम्बईके मालाबार हिलमें स्थित इस भवनका डिजायन वास्तुशिल्प क्लाउड बाटलीने यूरोपीय शैलीमें तैयार किया था और उसमें पाकिस्तानके संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना १९३० के दशकके उत्तरार्द्ध तक रहे थे । इस भवनका मुंह समुद्रकी ओर है ।  इससे पूर्व पाकिस्तानने कहा था कि जिन्ना हाउस उसका है और भारतद्वारा उसे अपने नियन्त्रणमें लेने की किसी भी प्रयास को स्वीकार नहीं किया जाएगा । साथ ही पाकिस्तान मांग करता रहा है कि यह सम्पत्ति उसके मुम्बई वाणिज्य दूतावासके लिए उसे दे दी जाए ।

कुमारने कहा कि शासन जिन्ना हाऊसको यहांके ‘हैदराबाद हाऊस’की भांति उपयोगमें लानेपर विचार कर रहा है । शासन हैदराबाद हाऊसका प्रयोग विदेशोंके विशिष्ट अतिथियोंके साथ बैठक करने और उनके आतिथ्यके लिए करता है । कुछ दिवस पूर्व विदेश मन्त्री सुषमा स्वराजने कहा था कि उनका मन्त्रालय इस भवनको अपने नाम करानेकी प्रक्रियामें जुटा है ।

पाकिस्तानके प्रधानमन्त्री इमरान खानने एक बार पुनः कश्मीर राग अलापा है । इसके साथ ही इमरानने गुरुवारको संयुक्त राष्ट्रके महासचिव एंतोनियो गुतारेससे विनती की कि कश्मीरमें कथित मानवाधिकार उल्लंघनोंका संज्ञान लें ।

गुतारेससे चरभाषपर हुई वार्तामें खानने इन उल्लंघनोंको समाप्त किए जानेमें संयुक्त राष्ट्रकी भूमिकाको चिह्नित किया । कश्मीरके पुलवामामें सात नागरिकोंकी हत्या की निंदा करने और प्रकरणको संयुक्त राष्ट्रमें उठानेकी चेतावनी देनेके कुछ दिवस पश्चात खानने संयुक्त राष्ट्र प्रमुखको चलभाष किया । इससे भिन्न संघीय मन्त्रिमण्डलने अपनी बैठकमें कश्मीरमें राष्ट्रपति शासन लगाए जानेकी निंदा की । सूचना मन्त्री फवाद चौधरीने कहा कि मन्त्रिमण्डलकी बैठक इस्लामाबादमें हुई जिसकी अध्यक्षता प्रधानमन्त्री खानने की ।

पाकिस्तानके प्रधानमन्त्री इमरान खानके जम्मू-कश्मीरके पुलवामा जनपदमें सात भारतीय नागरिकोंकी मृत्युके प्रकरणमें की गई टिप्पणीपर भारतने पाकको चेतावनी दी । साथ ही भारतने कहा कि पडोसी देशमें हस्तक्षेप करनेके स्थानपर इस्लामाबाद अपने मुद्दोंपर ध्यान दे, जहां अव्यवस्थाकी स्थिति है ।

विदेश मन्त्रालयके प्रवक्ता रवीश कुमारने खानकी टिप्पणीके सन्दर्भमें पूछे जानेपर कहा कि मुझे लगता है कि अच्छा यह होगा कि वे अपने कामपर ध्यान लगाएं और अव्यवस्थित चल रहे आन्तरिक प्रकरणको सुलझाएं । उन्होंने कहा कि पाकिस्तानने अपनी भूमिपर गतिविधियां चला रहे आतंकी समूहोंके विरुद्ध कोई पग नहीं उठाया है और उनकी ओरसे आ रहे वक्तव्य उसकी उच्श्रृंख्लता और दोहरेपनको प्रदर्शित करता है । इससे पूर्व पाकिस्तानके प्रधानमन्त्रीने संयुक्त राष्ट्रके प्रमुख एंटोनियो गुतारेसको चलभाष कर पुलवामामें सात लोगोंके मारे जानेकी घटनाको मानवाधिकारका प्रकरण बताया था । साथ ही इसका संज्ञान लेनेको कहा था ।

 

“वस्तुत: पाकिस्तान जिन्ना हाउसकी बात तो त्याग ही दे, क्योंकि जिस भूमिपर वे पल रहे हैं, वह भी भारतद्वारा प्रदत्त है और शासनने भी इसका नाम परिवर्तित कर राष्ट्रहितमें कोई स्थल खोलना चाहिए, क्योंकि विभाजनके लिए उत्तरदायी ऐसे राष्ट्रद्रोही नामोंका देशको कोई लाभ नहीं है ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान



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