दिसम्बर २१, २०१८
उत्तराखण्ड उच्च न्यायालयने सन्त श्रीआसारामके आश्रमको रिक्त करानेपर लगे स्थगनादेशको हटा दिया है, जिससे वन विभाग ऋषिकेशके निकट वन भूमिपर स्थित उनके आश्रमको हटानेके लिए स्वतन्त्र हो गया है ! २०१३में वन विभागने मुनिकी रेती स्थित सन्त श्री आसारामजी आश्रमके विरुद्ध इस आधारपर बेदखली आदेश जारी किए थे कि उसका ठेका (लीज) १९७० में समाप्त हो चुका है और बादमें कभी नवीनीकरण ही नहीं हुआ । उच्च न्यायालयने वन विभागके इस बेदखली आदेशपर स्थगनादेश दिया था । अब न्यायमूर्ति मनोज तिवारीने इस स्थगानादेशको हटा दिया है, जिसके पश्चात वन विभागका बेदखली आदेश पुनः लागू हो गया है । इस प्रकरणको सामने लाने वाली स्टीफन दुबेके अधिवक्ता कार्तिकेय हरिगुप्ताने कहा ,‘‘केवल २० वर्षोंकी समयसीमा वाली १९५० की मूल ठेकेके (लीजके) प्रमाणको न्यायालयके समक्ष प्रस्तुत किया गया था ।’’ न्यायालयके सामने यह भी कहा गया कि वन संरक्षण अधिनियम – १९८० के अनुसार, आश्रमके ठेकेका नवीनीकरण भी नहीं किया जा सकता; क्योंकि वन भूमिपर स्थित आश्रममें गैर वानिकी गतिविधियोंका संचालन हो रहा है ।
“हिन्दू बहुल राष्ट्रमें यह कार्यवाही हिन्दू सन्तोंके आश्रमपर करने वाले न्यायालय, क्या कभी मिशनरी संचालित विद्यालयों अथवा गिरिजाघरों, अवैध मदरसोंपर ऐसा आदेश देंगें !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : नभाटा
Leave a Reply