आयुर्वेद अपनाएं, स्वस्थ रहें ! (भाग – १२)


चुकन्दर (पालङ्गशाकः, Beetroot) एक मूसला जडवाली वनस्पति है । यह ‘बीटा वल्गैरिस’ नामक जातिके पौधे होते हैं, जिन्हें मनुष्योंने शताब्दियोंसे कृषिमें उत्पन्न किया है । यह एक ऐसा शाक है, जो भारतके लगभग प्रत्येक राज्यमें मिलता है ।
घटक – चुकन्दर लौह तत्वका अच्छा स्रोत माना जाता है; क्योंकि इसमें ‘फोलिक अम्ल’ पाया जाता है, जो कि रक्त बढानेके लिए आवश्यक होता है, इसके साथ ही इसमें ‘बीटानिन’ नामक पदार्थ पाया जाता है, जो इसे गुलाबी रंग प्रदान करता है, इसके साथ ही चुकन्दरमें ‘नाइट्रेट’, ‘मैग्नीशियम’, ‘सोडियम’, ‘पोटैशियम’, ‘फॉस्फोरस’, ‘कैल्शियम’, ‘कार्बोहाइड्रेट’, ‘आयोडीन’, ‘बीटेन’, ‘नियासिन’, ‘विटामिन बी-१, बी-२ और सी’ पाया जाता है ।
आज हम आपको चुकन्दरके लाभके विषयमें बताएंगे –
* उच्च रक्तचाप : रक्तचापको (ब्लडप्रैशरको) न्यून करनेके लिए चुकन्दर खाना लाभदायक माना जाता है; क्योंकि चुकन्दरमें सोडियम और वसा अल्प मात्रामें होते हैं, जो उच्च रक्तचापको न्यून करनेमें सहायता करते हैं । लंदनके ‘सीन मेरी’ विश्वविद्यालयमें किए गए एक अध्ययनके अनुसार, चुकन्दरका २०० मिलीलीटर रस ४ सप्ताह तक पीनेसे रक्तचापके स्तरमें न्यूनता पाई गई ।
* हृदय रोगमें : चुकन्दरका नियमित सेवन हृदयको स्वस्थ रखनेमें आपकी सहायता कर सकता है, जिससे यह हृदय रोगके (हृदयाघात) संकटको न्यून (कम) करता है । एक अध्ययनके अनुसार, नियमित चुकन्दरके रसका सेवन १ सप्ताह तक करनेपर हृदय रोगमें लाभ मिला और उनके रक्तचापमें सुधार देखा गया है !
* मांसपेशियोंका पोषण : चुकन्दर मांसपेशियोंतक प्राणवायुको (ऑक्सीजन) पहुंचानेकी क्षमतामें सुधार करता है, आपको ज्ञात होगा कि यदि मांसपेशियोंको पर्याप्त मात्रामें ऑक्सीजन नहीं मिलती है तो वे दुर्बल हो जाती हैं, जिससे हमें थकान अनुभव होती है और हमारी शारीरिक गतिविधियोंमें कमी आती है, ऑक्सीजनकी न्यूनतासे (कमीसे) अन्तमें हृदयसे सम्बन्धित रोग होनेकी सम्भावनाएं बढ जाती हैं ।
* एनीमियामें (रक्त अल्पतामें) लाभप्रद : जिन महिलाओंको रक्ताल्पता होता है, चुकन्दर उनके लिए  वरदान है । यह रक्तको पूर्ण करता है । चुकन्दरके पत्ते भी रक्तकी अल्पताको (कमीको) दूर करनेमें अत्यन्त उपयोगी होते हैं । इसमें लौह तत्वकी बहुत अधिक मात्रा पाई जाती है और यह लाल रक्त कणोंकी वृद्धि करनेमें सहायक होता है ।

* मधुमेह : मधुमेहके (शुगरके) रोगियोंके लिए यह बहुत लाभदायक होता है । इसके सेवनसे न केवल मीठा खानेकी इच्छाको शान्त किया जा सकता है, वरन इसे खानेसे मधुमेहके रोगी स्वस्थ भी रहते हैं ।
सेवन विधि : विश्वके कई स्थानोंमें चुकन्दरकी जामुनी जडको कच्चा, उबालकर या भूनकर खाया जाता है । इसे अकेले या अन्य शाकके (तरकारियोंके) साथ खाया जा सकता है और इसका अचार भी डाला जाता है । भारतीय भोजनमें इसे महीन काटकर और हलका-सा पकाकर मुख्य भोजनके साथ खाया जाता है । चुकन्दरके पत्तोंको भी खाया जाता है, इनका प्रयोग आहारमें कच्चा, उबालकर या भाप-देकर होता है ।
*सावधानियां – १. प्रतिदिन चुकन्दरका रस पीना हानिकारक हो सकता है, इसलिए इसका प्रयोग सप्ताहमें तीन बारसे अधिक नहीं करना चाहिए । एक बारमें चुकन्दरके रसकी आठ औंससे (लगभग २२० ग्रामसे) अधिक मात्रा लेना हानिकारक हो सकता है ।
२. प्रतिदिन चुकन्दरके रसका सेवन वृक्ककी (किडनीकी) पथरीके लिए उत्तरदायी हो सकता है ।
३. इसका अत्यधिक सेवन शरीरमें ‘कैल्शियम’के स्तरको अल्प करता है, जिसके कारण अस्थियोंकी अशक्ततासे सम्बन्धित समस्याएं हो सकती हैं ।

 



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution