आयुर्वेद अपनाएं, स्वस्थ रहें ! (भाग – १७)


शलजम (गृञ्जनः, Turnip) शीत ऋतुका एक शाक (सब्जी) है, जिसमें स्‍वास्‍थ्‍य लाभ प्रचुर मात्रामें है । शलजम एक श्वेत (सफेद) कन्दमूल शाक है, जो मानव उपभोग और पशुओंके भोजनके लिए विश्व स्तरपर लोकप्रिय है । पौष्टिक मूल्य और इसके स्वादके लिए शलजम सामान्यत: समूचे विश्वमें समशीतोष्ण क्षेत्रोंमें उत्पन्न की जाती है । यह दो सहस्र वर्षोंसे मानव आहारके एक महत्वपूर्ण भागके रूपमें जानी जाती है ।
सेवन विधि – शलजम बैंगनी और लाल रंगके होते हैं, जिनका आन्तरिक भाग श्वेत होता है । इसका मूल भाग कच्चा ही खाया जाता है । इसके पत्ते हरे रंगके होते हैं, जो पालक जैसी पौष्टिक पत्तेदार शाककी भांति ही खाए जाते हैं । शलजमको कच्‍चे या उबालकर खाया जा सकता है ।
घटक – इसमें ‘कैलोरी’, ‘प्रोटीन’, वसा, ‘कार्बोहाइड्रेट’, ‘फाइबर’, ‘कैल्शियम’, लौहतत्व, ‘मैग्‍नीशियम’, ‘फॉस्‍फोरस’, ‘विटामिन-के, सी, बी-६’, ‘सोडियम’, ‘जिंक’, ‘पोटैशियम’, ‘फोलेट’ और तांबा भी प्रचुर मात्रामें होते हैं ।
आइए, शलजमके लाभके विषयमें जानते हैं –
नेत्रोंके लिए – शलजममें ‘ल्‍यूटिन’की उपस्थिति पर्याप्‍त मात्रामें होती है । इसमें उपस्थित एक ‘कैरोटीनोइड’, जो नेत्रोंके लिए लाभप्रद है और मोतियाबिंद जैसी नेत्रोंके रोगको रोकनेमें भी सहायक है ।
भार (वजन) न्यून करनेमें – ‘फाइबर’की उच्‍च सामग्री चयापचयको नियन्त्रित करती है, शलजममें ‘फाइबर’ प्रचुर मात्रामें होता है, जो शरीरके भारको नियन्त्रित करनेमें सहायता करता है और उदरको स्‍वस्‍थ व सक्रिय रखनेमें सहायता करता है ।
हृदयके लिए – शलजममें ‘विटामिन-के’की अत्यधिक मात्रा होती है, जिसमें शक्तिशाली प्रज्वलनरोधी (एंटी-इंफ्लामैट्री) गुण होते हैं । शलजम शरीरमें उपस्थित रक्तवसाका उपयोग करने वाले पित्तको अवशोषित करके पाचनमें सहायता करता है । इसमें उपस्थित ‘फोलेट’ हृदयाघात, धमनीमें जमने वाले ‘प्लेक’के विरुद्ध हृदयकी रक्षा करता है तथा रक्त वाहिकाओं सम्बन्धी प्रणालीको सुचारु रूपसे चलानेमें सहायक है ।
अस्थियोंके (ह‍ड्डीयोंके) लिए – अस्थियोंको सशक्त करनेके लिए शलजमका नियमित सेवन कर सकते हैं । इसमें ‘पोटैशियम’ और ‘कैल्शियम’की प्रचुर मात्रा होती है, जो अस्थि-सुषिरताको (आस्टियोपोरोसिस) न्यून करनेमें सहायक है । ‘कैल्शियम’ शरीरके संयोजी ऊतकोंके ( कनैक्टिव टिशूजके) उत्‍पादनको बढाता है, जिससे अस्थियोंके रोगोंको रोकनेमें सहायता मिलती है ।
* कर्करोगमें – इन क्रूसिफेरस (गोभीकी प्रजाति) शाकमें आक्सीकरण-रोधी (एंटीऑक्सीडेंट) और ‘फाइटोकेमिकल्‍स’ अधिक मात्रामें होते हैं, जो कर्करोगको नहीं होने देते हैं । शलजमका सेवन ‘ग्‍लूकोसिनोलेट्स’की उपस्थितिको अल्प करता है और साथमें कर्करोगके प्रभावको भी अल्प करता है । शलजम यकृतसे विषाक्‍त पदार्थोंको हटानेमें सहायक है और ‘ट्यूमर’ कोशिकाओंके विकासको बाधित कर सकता है ।
* पाचनके लिए – ‘फाइबर’की अधिक मात्रा पाचन तन्त्रको सशक्त करनेमें सहायक है । शलजममें ‘फाइबर’ बहुत अधिक मात्रामें पाया जाता है । अध्‍ययनोंसे ज्ञात हुआ है कि ‘ग्‍लूकोसिनोलेट्स’ उदरके जीवाणु, जैसे ‘पिलोरी’की सहायता करते हैं, जो आपके पाचनको सरल बनानेमें सहायक हैं ।
सावधानियां –  शलजम सीमित मात्रामें ही ग्रहण करना चाहिए । इसका अत्यधिक सेवन हानि करता है ।
१. शलजममें ‘ऑक्‍सीलेट्स’की अत्यल्प मात्रा होती है, जो गुर्दे या पित्ताशय वाले रोगियोंके लिए स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याएं उत्पन्न कर सकती है ।
२. ‘थायरॉइड’ समस्‍याओं वाले व्‍यक्तियोंको शलजमका सेवन नहीं करना चाहिए, क्‍योंकि इसमें ‘गोइट्रोजन’ नामक पदार्थ होते हैं, जो ‘थायराइड ग्रन्थि’के कार्यमें व्‍यवधान उत्‍पन्‍न कर सकते हैं ।
३. शलजममें ‘सल्‍फर’ यौगिक होते हैं, जो कुछ लोगोंमें उदरका (पेटका) फूलना और पाचन समस्‍याओंका कारण बन सकते हैं ।



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