दिसम्बर २८, २०१८
आतंकवादी संगठन ‘इस्लामिक स्टेट’के जिस नूतन ‘मॉड्यूल’का प्रकटीकरण राष्ट्रीय जांच विभागने (एनआईए) किया है, उसे ‘अबु हुजैफा अल बाकिस्तानी’के नामसे ऑनलाइन नियन्त्रण किया जा रहा था । इसे भिन्न-भिन्न ‘ऑनलाइन प्लेटफॉर्म’से संचालित किया जा रहा था, जिसके लक्ष्यपर कई भारतीय युवा थे ! सूत्रोंने बताया कि यह ‘मॉड्यूल’ दक्षिण-पूर्व एशियाके युवाओंको ‘आईएस’में सम्मिलित करनेके लिए भ्रमित करता था ।
सूत्रोंने बताया कि ‘फेसबुक’पर सम्पर्क होनेके पश्चात युवाओंको समूहमें जोडा जाता और ‘टेलीग्राम’ व ‘थ्रीमा’केद्वारा सन्देश भेजे जाते ! गुप्तचर विभागके एक सूत्रने कहा कि इसकी जांचपर जानकारी मिली है कि इसे पाकिस्तानके नागरिकद्वारा संचालित किया जा रहा था, जिसे प्रशिक्षण दिया गया और सम्भवत: पाकिस्तानकी गुप्तचर विभाग ‘आईएसआई’के आश्रयपर यह युवाओंको जोड रहा था ।
सू्त्रोंसे मिली सूचनाके अनुसार, अबु हुजैफा हैंडल सुरक्षा विभागकी जांचमें कई बार सामने आया । तेलंगाना पुलिसकी ‘काउंटर इंटेलिजेंस यूनिट’की जांचमें भी इस हैंडलका ज्ञात हुआ, जिसके आधारपर छापेमारीसे पूर्व महत्वपूर्ण जानकारी मिली ।
एक अधिकारीने बताया कि गत वर्षसे यह ‘हैंडल’ काफी सक्रिय हो गया था । ‘इण्डियन मुजाहिदीन’से विरोधकर बादमें ‘आईएस’के ‘खोरासन मॉड्यूल’में सम्मिलित होने वाला शफी अरमार इस हैंडलको संचालित कर रहा था । वह भारतीय युवाओंको ‘आईएस’में समिलित करनेके लिए सहायता करनेका कार्य करता था ।
माना जाता है कि कर्नाटकसे सम्बन्ध रखने वाले अरमारको गत वर्ष सीरियामें मार दिया गया । उसने लगभग १००० युवाओंको आईएसमें सम्मिलित होनेके लिए बल दिया, जिनमेंसे अधिकतर दक्षिण एशियाके थे । उसका भाई सुल्तान अरमार २ वर्ष पूर्व ड्रोन स्ट्राइकमें मारा गया था । एक अधिकारीने दावा किया कि सोहैल मुफ्तीको इसलिए चुना गया, क्योंकि वह शस्त्रोंके कार्यमें सम्मिलित रहा था ।
“आइएसका भारतमें बढता प्रभाव देशके लिए शुभ संकेत नहीं है । सबसे मुख्य बात यह है कि इनके चंगुलमें धर्मान्ध ही जा रहे हैं, क्योंकि उन्हें ज्ञात है कि धर्मान्ध इस्लामके प्रति ही निष्ठा व्यक्त करेगा ! शासन अब आतंकी संगठनको भारतमें रोकने हेतु त्वरित कार्यवाही करे, यही राष्ट्र हितमें है ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : नभाटा
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