पकडे गए संदिग्ध आतंकियोंके लक्ष्यपर था कुम्भ मेला, आक्रमणकी आशंकासे बढी सतर्कता
राजधानी देहली और उत्तरप्रदेशके अमरोहासे पकडे गए संदिग्ध आतंकियोंके लक्ष्यपर कुम्भ मेला भी था ! इसकी आशंकाने आतंक निरोधी दल (एटीएस) सहित अन्य सुरक्षा विभागोंकी व्यग्रता बढा दी है । ‘एटीएस’ इस दिशामें अब और गहनतासे अन्वेषणमें लग गई है । पकडे गए संदिग्ध आतंकियोंसे इस दिशामें भी पूछताछ की जाएगी । कुम्भ मेलेमें किसी आतंकी घटनाके षड्यन्त्रको लेकर पहले ही चेतावनी दी जा चुकी है । आतंकियोंके साधुओंकी वेशभूषामें कुम्भकी सुरक्षा-व्यवस्थामें सेंध लगानेकी आशंका भी गुप्तचर विभाग प्रकट कर चुका है । ऐसेमें अमरोहा, मेरठ व लखनऊमें ‘आइएस’के नूतन ‘मॉड्यूल’, ‘हरकत-उल हर्ब-ए-इस्लाम’के संदिग्ध आतंकियोंकी सक्रियता सामने आनेके पश्चात उनकी योजनाओंको लेकर बडे प्रश्न खडे हो रहे हैं ।
‘एनआइए’के साथ संयुक्त कार्यवाहीके लिए ‘एटीएस’के ‘एसएसपी’ विनोद कुमार सिंह व ‘डिप्टी एसपी’ अतुल यादवको लगाया गया है । प्रथम बार ‘एटीएस’के दलमें प्रशिक्षित किए गए ४२ सैन्य बल भी अभियानमें लगाए गए हैं । भिन्न-भिन्न स्थानोंपर छापेके समय सैन्य बल भी सक्रिय भूमिकामें हैं ।
इस मध्य देहली और उत्तरप्रदेशमें हुई संदिग्ध बन्दियोंका लखनऊसे सम्पर्क भी सामने आया है । बुधवारको एनआइए व एटीएसके संयुक्त दलने ‘हरकत-उल हर्ब-ए-इस्लाम’ संगठनके जिन संदिग्ध आतंकियोंको बन्दी बनाया है, उनका लखनऊसे सम्पर्क है ।
यह बात सामने आई है कि सिटी स्टेशनके पास रहनेवाली एक महिलाने अपने आभूषण विक्रयकर संदिग्ध आतंकियोंको लगभग पौने तीन लाख रुपये दिए थे !
*यदि आतंकवादका कोई धर्म नहीं होता तो गुप्तचर विभागद्वारा मात्र हिन्दू मन्दिर, तीर्थक्षेत्र और मेला, इत्यादि हिन्दूओंके आस्था स्थानोंपर ही सदैव आक्रमणकी आशंका क्यों व्यक्त की जाती है ? सात दशककी स्वतन्त्रताके पश्चात भी हम हिन्दू निडर होकर कुम्भ नहीं मना सकते हैं, क्या इसी स्वतन्त्र भारतकी कल्पना करते हुए हमारे स्वतन्त्रता सेनानियोंने अपने प्राणोंकी बलि दी थी ? इस तथाकथित स्वतन्त्रतासे हमें वास्तविक स्वतन्त्रताकी ओर शीघ्र अग्रसर होना होगा, अन्यथा भारत भी कुछ वर्षोंमें सीरिया और अफगानिस्तान बन जाएगा; अतः इस समस्यापर उपाय हेतु भारतको एक सशक्त हिन्दू राष्ट्रके रूपमें स्थापित करना अति आवश्यक हो गया है !* – तनुजा ठाकुर
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