आलू (संस्कृत नाम – आलुः, सुकन्दः, अंग्रेजी नाम – Potato) एक प्रकारका शाक है, जो भूमिके नीचे उत्पन्न होता है । यह प्रत्येक घरमें प्रयोग होनेवाला शाक है । अपने स्वास्थ्य लाभके कारण यह समूचे विश्वमें एक प्रमुख आहारके रूपमें उपयोग किया जाता है । आलू सबसे अधिक एंडिस, पेरू और बोलिवियामें पाए जाते हैं, परन्तु इसके उपयोगके कारण भारत भी इसके उत्पादनका बडा केन्द्र बन चुका है ।
* घटक – आलूमें मुख्य रूपसे ‘कार्बोहाइड्रेट’ और वसा पाए जाते हैं । इनमें ‘लूटिन और जैक्सैंथिन’ जैसे ‘कैरोटेनोड्स’ (Carotenoids) सम्मिलित होते हैं । आलूमें ‘पोटैशियम’, ‘कैल्शियम’, लोहा और ‘फास्फोरस’ जैसे खनिज तत्व होते हैं । आलूमें ‘विटामिन-ए, बी और सी’ भी होते हैं । हमारे अच्छे स्वास्थ्यको बढावा देनेके लिए आलूके ‘फाइटोन्यूट्रिएंट’में ‘कैरोटीनोइड’, ‘फ्लैवोनोइड्स’ और ‘कैफीक’ अम्ल सम्मिलित होते हैं ।
सेवन विधि – आलूको भूनकर खाया जा सकता है । इसके अतिरिक्त आलूका शाक, पराठे, चाट आदि बनते हैं । आलूके अन्य कई प्रकारके व्यंजन बनते हैं ।
आइए, हम आलूके स्वास्थ्य लाभके विषयमें जानेंगें –
* शारीरिक भार वृद्धिके लिए – आलूमें मुख्य रूपसे ‘कार्बोहाइड्रेट’ पाया जाता है और इसमें ‘प्रोटीन’की मात्रा अल्प (कम) होती है । आलूमें ‘विटामिन-सी और बी-कॉम्लेकस’ भी सम्मिलित होते हैं, जो कार्बोहाइड्रेटके उचित अवशोषणमें सहायक हैं । यही कारण है कि आलू शरीरके भार वृद्धिमें सहायक है ।
* हृदय स्वस्थ रखनेमें – उच्च रक्तचाप, हृदय रोगोंका मुख्य कारण होता है । आलूमें बहुतसे खनिज पदार्थ होते हैं, जो रक्तचापको न्यून करनेमें सहायक हैं । कुछ अध्ययन बताते हैं कि ‘पोटैशियम’की उच्च मात्रा हृदय रोगोंकी सम्भावनाको न्यून करती है ।
* मुखपर आलूका रस लगानेके लाभ – आलूमें ‘विटामिन-सी और बी-कॉम्प्लेक्स’की प्रचुर मात्रा होती है । साथ ही, इसमें ‘पोटैशियम’, ‘मैग्नीशियम’, ‘फॉस्फोरस’ और जस्ता जैसे खनिज पदार्थ भी होते हैं, जो त्वचाके लिए अत्यधिक लाभप्रद होते हैं । आलूको पीसकर उसमें मधुका (शहदका) मिश्रणकर मुखपर लगानेसे त्वचापर मुंहासे और धब्बेकी चिकित्सा होती है ।
* त्वचाके लिए – यदि त्वचामें जलन हो रही हो या जल गया हो तो जलनवाले स्थानपर आलू और मधुके (शहदके) मिश्रणका उपयोग कर सकते हैं । यह त्वचाकी जलनमें त्वरित लाभ देता है । आलू त्वचाको नरम और स्वच्छ करनेके लिए अत्यधिक लाभप्रद है ।
* कर्करोगमें – लाल और रसवाले आलूओंमें ‘फ्लैवोनॉयड एंटीआक्सिडेंट’ जैसे ‘जेक्सैंथिन’ और ‘कैरोटीन’, ‘विटामिन-ए’ आदिकी प्रचुर मात्रा उपलब्ध होती है, जो आपकी कई प्रकारके कर्करोगसे (कैंसरसे) रक्षण कर सकती है । इसके अतिरिक्त कृषि अनुसंधानके एक अध्ययनसे ज्ञात हुआ है कि आलूमें कर्करोग विरोधी गुणवाला ‘कार्सोटिन’ नामक एक यौगिक होता है । आक्सीकरण रोधी (एंटीआक्सीडेंट) गुणों वाले ‘विटामिन-ए और सी’, शरीरका कर्करोगके प्रभावसे रक्षण करनेमें सहायक हैं ।
* पथरीको दूर करनेमें – वृक्कके (गुर्देके) पत्थर मुख्य रूपसे रक्तमें यूरिक अम्लकी वृद्धिके कारण होते हैं । लोहे और ‘कैल्शियम’ भी वृक्कके पत्थरोंके गठनमें सहायक हैं और आलूमें दोनों ही अच्छी मात्रामें होते हैं, जो वृक्कके पत्थरोंके निवारक उपायके रूपमें उपयुक्त नहीं होते; परन्तु आलूमें ‘मैग्नीशियम’ भी होता है, जो वृक्क और अन्य ऊतकोंमें ‘कैल्शियम’के संचयको रोकता है, जो पथरीकी चिकित्सामें लाभप्रद है । पथरीके रोगीको केवल आलू खिलाकर और बार-बार अधिक जल पिलाते रहनेसे पथरियां और रेतके कण सरलता पूर्वक निकल जाते हैं ।
* अतिसारमें (दस्तमें) – अतिसारके लिए आलूका उपयोग बहुत ही प्रभावी माना जाता है । आलू, अतिसार पीडित रोगियोंके लिए पौष्टिक आहारका उत्तम विकल्प होता है; क्योंकि यह सरलता पूर्वक पच जाता है, परन्तु ‘स्टार्च’की अधिकताके कारण आलूका अधिक मात्रामें सेवन करनेसे अतिसारकी प्रक्रियाको बढा सकता है; इसलिए अतिसारकी स्थितिमें आलूका सेवन अल्प मात्रामें ही करना चाहिए ।
* गठियामें – ‘कैल्शियम और मैग्नीशियम’ जैसे पोषक तत्वोंकी उपलब्धताके कारण आलू गठिया रोगमें लाभप्रद है । इसके अतिरिक्त उबलते आलूसे प्राप्त जल, वेदना और गठियाकी सूजनमें लाभ देता है । आलूमें ‘पोटैशियम सॉल्ट’ होता है, जो अम्लपित्तको रोकता है । चार आलूको सेंक लें और फिर उनका छिलका उतार कर नमक, मिर्च डालकर नित्य खाएं, इससे गठियामें लाभ मिलता है ।
सावधानियां –
१. यद्यपि आलू खाना सामान्यतया सुरक्षित माना जाता है, तथापि कुछ रोगोंमें लोगोंको आलूके अधिक मात्रामें सेवन करनेसे बचना चाहिए ।
२. खाद्य ‘एलर्जी’ एक सामान्य स्थिति है, जो कुछ लोगोंको आलूमें मुख्य ‘प्रोटीन’मेंसे एक ‘पेटैटिन’के कारण हो सकती है ।
३. यदि आप भार न्यून करनेके लिए सोच रहे हैं तो आलूके सेवनसे बचना चाहिए ।
४. मधुमेहसे ग्रस्त व्यक्तियोंको आलूके सेवनसे बचना चाहिए, क्योंकि इससे आपकी रक्त शर्करामें असन्तुलन बढ सकता है ।
५. गर्भवती महिलाओंको कच्चे आलूके सेवनसे बचना चाहिए ।
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