उत्तिष्ठ कौन्तेय


यदि आप बाजारसे देसी घी क्रयकर (खरीदकर) खा रहे हैं तो थोडा सावधान रहें। इसकी गुणवत्ता जांच लें । हिमाचल प्रदेशके सिरमौर जनपदके ददाहूमें एक ‘ब्रांडेड’ कंपनीके देसी घीमें स्वास्थ्यके लिए अत्यन्त हानिकारक कोलतार रंग पाया गया है, यह रसायन घीको पीला करनेके लिए मिलाया गया ।
घीके नमूनेकी जांच-ब्यौरा आनेके पश्चात खाद्य सुरक्षा विभागने महाराष्ट्रकी कंपनीके उत्पादके विक्रयपर रोक लगाकर बाजारसे भंडार (stock) वापस मंगवा लिया है । कंपनी और विक्रेता, दोनोंके विरुद्ध न्यायालयमें अभियोग प्रविष्ट करनेकी तैयारी है, इसकी औपचारिकताएं पूरी कर ली गईं हैं। कंपनीके देसी घीमें वनस्पति तेल (वेजिटेबल ऑयल)के भी अंश पाए गए हैं। घी ‘गोपाल कृष्ण’ ब्रांडके नामसे विक्रयकी जा रही थी ।
*समाजको धर्म न सिखानेके कारण ही आजका व्यापारी वर्ग सभी वस्तुओंसे अधिक धन अर्जित करनेके लोभमें मिलावट करते हैं और वह भी ऐसा जिससे समाजके स्वास्थ्यकी अत्यधिक हानि हो ! वस्तुओंमें मिलावटकर, उसे अशुद्ध करना एक महापाप है, इसके परिणामस्वरुप मृत्यु उपरान्त छठे पातालमें तीव्र यातनाएं सहन करनेको मिलती हैं और अगले जन्ममें भी व्यक्ति आजीवन असाध्य रोगोंसे ग्रस्त रहता है, यदि  यह ज्ञान शिक्षण प्रणालीमें दी गई होती तो आज खाद्यके क्षेत्रकी गुणवत्तामें इतनी गिरावट नहीं आती ! धर्मके ज्ञानसे विरहित समाज कितनी सीमा तक गिर जाता है, यह आप इससे ही समझ सकते हैं कि आज फल, शाक, खाद्यान, तेल, घी, पानी, हवा, कुछ भी शुद्ध नहीं मिलता है ! इसलिए धर्म अधिष्ठित राष्ट्रीय प्रणालीकी आवश्यकता है, जहांपर लोगोंको धर्मका ज्ञान बाल्यकालसे ही दिया जायेगा ! धर्माचरणी, ईश्वरनिष्ठ समाज ही मानव कल्याणके विषयमें सोच सकता है; निधर्मी समाजने हमें यह सीख तो अवश्य ही दे दी है !* – *तनुजा ठाकुर*



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution