जनवरी १, २०१८
मध्यप्रदेशमें कमलनाथ शासन अपने गठनके पश्चात ही विवादोंमें है । इसी सन्दर्भमें कमलनाथ शासनने एक ऐसा निर्णय लिया है, जिससे राजनीतिक भूचाल आना निर्धारित है ।
कमलनाथने प्रत्येक माहकी एक तारीखको मन्त्रालयमें गाए जाने वाले ‘वन्दे मातरम’को बंद करनेका निर्णय लिया है । प्रदेशके शिवराज शासनने इस परम्पराका आरम्भ किया था । इसके अन्तर्गत मन्त्रालयके सभी कर्मचारी माहकी प्रथम तिथिको परिसरमें एकत्र होकर एकसाथ राष्ट्रगीत मिलकर ‘वंदे मातरम’ गान करते थे ।
जहां कांग्रेस राष्ट्रगीतके मुद्देपर अपना रवैया स्पष्ट नहीं करती, वहीं भाजपा कांग्रेसपर तुष्टिकरणके आरोप लगाकर घेरती रहती है । इसपर कांग्रेसको घेरते हुए कुछ दिवस पूर्व भाजपा अध्यक्ष अमित शाहने कहा था कि यह किसी धर्मसे जुडा हुआ नहीं हो सकता है, परन्तु कांग्रेसने गीतपर प्रतिबंध लगाकर इसको धर्मसे जोड दिया ।
बता दें कि इससे पूर्व अपने घोषणा पत्रमें शासकीय कर्मचारियोंके संघकी शाखाओंमें जानेपर प्रतिबन्ध लगानेकी बात कही थी । कांग्रेसके अनुसार शासकीय भवनोंके परिसरोंमें संघकी शाखाओंका आयोजन नहीं किया जा सकता ।
“मन्त्रालयमें इफ्तार हो सकती है, परन्तु भारतीयोंमें क्रान्तिका बिगुल फूंकनेवाला राष्ट्रगीत नहीं ! कमलनाथजीको बताना चाहेंगें कि यह हिन्दवी राष्ट्र है, कोई इस्लामिक राष्ट्र नहीं जो वे यहां राष्ट्र गीत व संघकी शाखाओंको प्रतिबन्धित कर रहे हैं । संघकी शाखाओंमें न आइएसके ध्वज फहराए जाते हैं और न ही राष्ट्रगीतके पश्चात कोई तोडफोड करता है और तुष्टिकरणकी लालसामें राजाको अपने धर्मसे पीछे हटकर राष्ट्र व धर्मकी विडम्बना नहीं करनी चाहिए, अन्यथा राजा स्वयंके साथ प्रजाको भी ले डूबता है ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : नभाटा
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