आयुर्वेद अपनाएं स्वस्थ रहें  ! (भाग – २०.१)


तुलसी (संस्कृत नाम – त्रिदशमञ्जरी, अंग्रेजी नाम – Holi Basil) शब्दका अर्थ है, ‘अतुलनीय पौधा’ । तुलसी भारतमें सबसे पवित्र आयुर्वेदिक औषधि मानी जाती है और ‘औषधियोंकी रानी’ भी कहलाती है ।
भारतीय संस्कृतिमें तुलसीके पौधेका अत्यधिक महत्त्व है, यही कारण है कि सनातन परम्पराको मानने वाले प्रत्येकके घरमें तुलसीका पौधा अवश्य होता है । तुलसी मात्र हमारी आस्थाका प्रतीक नहीं है, इस पौधेके औषधीय गुणोंके कारण आयुर्वेदमें भी तुलसीको महत्त्वपूर्ण माना गया है । भारतमें शताब्दियोंसे तुलसीका प्रयोग होता चला आ रहा है ।
घटक : यह अल्प ‘कैलोरी’ वाली औषधि आक्सीकरण-रोधी (एंटीऑक्सीडेंट), जलन, सूजन न्यून करने और जीवाणुरोधी गुणोंसे समृद्ध है । इसके अतिरिक्त, यह ‘विटामिन-ए, सी और के’, ‘मैंगनीज’, तांबा, ‘कैल्शियम’, लोहा, ‘मैग्नीशियम’ और ‘ओमेगा -३’ जैसे आवश्यक पोषक तत्वोंसे परिपूर्ण है । यह सभी पोषक तत्व आपके समग्र स्वास्थ्यके लिए अत्यधिक लाभप्रद हैं ।
तुलसीके ५ प्रकार – श्याम तुलसी, राम तुलसी, श्वेत/विष्णु तुलसी, वन तुलसी, नींबू तुलसी ।
सेवन विधि – तुलसी अनेक प्रकारसे सेवन की जा सकती है । इसके पत्तोंको जलके साथ निगला जा सकता है अथवा मुखमें रखा जा सकता है । तुलसीको धूपमें सुखाकर इसका चूर्ण बनाकर लिया जा सकता है । इसके अतिरिक्त तुलसीको औषधियोंके रूपमें (द्रव्य, ठोस)  सेवन किया जा सकता है ।
आइए, तुलसीके लाभके विषयमें जानते हैं –
* लिवर (यकृत) – तुलसीकी १०-१२ पत्तियोंको उष्ण जलसे धोकर प्रतिदिन प्रातःकाल मुखमें रखकर इसका रस चूसें अथवा जलसे निगल लें, यकृतके रोगोंमें यह अत्यधिक लाभप्रद है ।
* उदर वेदना – एक चम्मच तुलसीकी पिसी हुई पत्तियोंको जलके साथ मिलाकर गाढा पेस्ट बना लें । उदरमें वेदना होनेपर इस लेपको नाभि और उदरके आस-पास लगानेसे लाभ मिलता है ।
* पाचन – पाचन सम्बन्धी समस्याओं जैसे अतिसार (दस्त लगना), वायुविकार (गैस बनना) आदि होनेपर एक गिलास जलमें १०-१५ तुलसीकी पत्तियां डालकर उबालें और काढा बना लें । इसमें चुटकी भर सेंधा नमक डालकर पीएं ।
* ज्वर – दो कप जलमें एक चम्मच तुलसीकी पत्तियोंका चूर्ण और एक चम्मच इलायचीका चूर्ण मिलाकर उबालें और काढा बना लें । दिनमें दोसे तीन बार यह काढा पी सकते हैं और स्वादके लिए इसमें मधु (शहद) भी मिला सकते हैं ।
* शीतप्रकोप : खांसीकी लगभग सभी पीनेवाली औषधियोंमें तुलसीका प्रयोग किया जाता है । तुलसीकी पत्तियां बलगम (कफ) समाप्त करनेमें सहायक हैं । तुलसीकी कोमल पत्तियोंको थोडे-थोडे समयमें अदरकके साथ चूसनेसे शीतप्रकोपमें (खांसी-जुकाममें) लाभ मिलता है ।
* शीत ऋतुमें रक्षण हेतु – वर्षा या शीत ऋतुमें रक्षाके लिए तुलसीकी लगभग १०-१२ पत्तियोंको एक कप दुग्धमें (दूधमें) उबालकर पीएं । इससे यह शीत ऋतुमें रक्षण करता है ।
तुलसीके कुछ अन्य लाभ व सावधानियोंके विषयमें हम अगले लेखमें बताएंगें ।



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