जनवरी १, २०१८
बहुजन समाज पार्टीकी ओरसे समर्थनपर पुनर्विचारका वक्तव्य सामने आनेके पश्चात मध्यप्रदेशमें कांग्रेस शासनने बडा पग उठाया है । राज्यके वैधानिक मन्त्री पीसी शर्माने बताया कि कमल नाथ शासन २ अप्रैल २०१८ को अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम १९८९ में संशोधनके विरुद्ध हुए ‘भारत बंद’ प्रदर्शनके समय प्रविष्ट किए गए अभियोग वापस लेगी ! इसके साथ ही गत १५ वर्षोंमें भाजपा शासनकी ओरसे प्रविष्ट किए गए ऐसे सभी अभियोग वापस लिए जाएंगे ।
उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश और राजस्थानमें शासन बनानेमें कांग्रेसको समर्थन कर रही बहुजन समाज पार्टीकी प्रमुख मायावतीने रविवारको कांग्रेस शासनके समक्ष अभियोग वापस लेनेकी मांग उठाई थी । साथ ही ऐसा न करनेकी स्थितिमें समर्थनपर पुनर्विचारकी बात भी कही थी ।
बसपाने विधानसभा मतदानमें मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ और राजस्थान तीनों राज्योंमें चुनाव लडा था । तीनों राज्योंमें उसे क्रमशः दो, दो और छह सीटोंपर विजय मिली थी । मध्य प्रदेशमें बहुमतसे दो पग दूर रह गई कांग्रेसके लिए सहयोगियोंका समर्थन संजीवनी बनकर सामने आया और १५ वर्षों पश्चात कांग्रेसने सत्तामें वापसी की है और बसपाको अनदेखा करना कांग्रेसके लिए समस्या बन सकती है ।
“भारतमें राजनीतिक दल अपने दलके उपद्रवियों, हत्यारों और यहां तक कि महिलाओंके साथ नृशंस कृत्य करने वाले कुकर्मियोंको भी बचा लेते हैं ! इससे ही ज्ञात होता है कि इस तथाकथित निधर्मी लोकतन्त्रसे व निधर्मी शासकोंसे हमें कुछ भी नहीं प्राप्त हुआ है, न विधान और न ही संस्कार ! शिसकवर्गकी ‘आधा तेरा और आधा मेरा’की नीतिने राष्ट्रको विकट परिस्थितिमें लाकर खडाकर दिया है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जनसत्ता
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