अभिनेता नसरुद्दीनने पुनः विष उगला, कहा कि मुझे पहले विधान (कानून) दिखता था, अब दिखता है अन्धकार !!


जनवरी ४, २०१८

 

‘एमनेस्टी इंडिया’ने गैर शासकीय संस्थाओंके विरुद्ध शासनकी कथित कार्यवाहीके विरोधमें शुक्रवार, ४ जनवरीको एक वीडियो जारी की, जिसमें अभिनेता नसीरुद्दीन शाहने दावा किया कि भारतमें धर्मके नामपर घृणाकी दीवार खडी की जा रही है और इस अन्यायके विरुद्ध बोलनेवाले लोगोंको दण्ड दिया जा रहा है ।

मानवाधिकारोंपर दृष्टि रखने वाली संस्था ‘एमनेस्टी’के लिए २.१३ मिनटके एकजुटता वीडियोमें शाहने कहा कि जिन लोगोंने मानवाधिकारोंकी मांग की, उन्हें कारावासमें डाला जा रहा है । उन्होंने वीडियो संदेशमें कहा, ”कलाकारों, अभिनेताओं, शोधार्थियों, कवियों सभीको दबाया जा रहा है । पत्रकारोंको भी चुप कराया जा रहा है ।

उन्होंने दावा किया, ”धर्मके नामपर घृणाकी दीवार खडी की जा रही है । निर्दोषोंकी हत्या की जा रही है । देश भयानक घृणा और क्रूरतासे भरा हुआ है । अभिनेताने कहा कि जो इस अन्यायके विरुद्ध खडा होता है, उन्हें चुप करानेके लिए उनके कार्यालयोंमें छापे मारे जाते हैं, अनुमतिपत्र (लाइसेंस) रद्द किए जाते हैं और बैंक खाते बन्द किए जाते हैं, ताकि वे सत्य न बोलें ।

उन्होंने उर्दूमें एक वीडियोमें कहा, ”हमारा देश कहां जा रहा है ? क्या हमने ऐसे देशका स्वप्न देखा था ?, जहां संतोषका कोई स्थान नहीं है, जहां केवल धनी और शक्तिशाली लोगोंको सुना जाता है और जहां निर्धन तथा सबसे दुर्बल लोगोंको दबाया जाता है ? जहां कभी विधान था, परन्तु अब बस अंधकार है ।

‘एमनेस्टी’ने अबकी बार मानवाधिकार ‘हैशटैग’के अन्तर्गत दावा किया कि भारतमें अभिव्यक्तिकी स्वतन्त्रता और मानवाधिकारोंकी पैरवी करनेवालोंपर बडी कार्यवाही की गई । एमनेस्टीने कहा, ”चलिए इस नववर्ष हमारे संवैधानिक मूल्योंके लिए खडे हों और भारत शासनको बताए कि अब कार्यवाही बंद होनी चाहिए ।

 


“हिन्दुओंकी विडम्बना तो कबसे हो रही है ! शासकदलोंद्वारा हिन्दुओंका शोषण आरम्भसे ही किया जाता रहा है, मुसलमान महिलाओंको तीन तलाक देकर सडकोंपर रहनेके लिए छोड दिया जाता है, मन्दिरोंको तोडकर मस्जिदोंका निर्माण किया जाता है, हिन्दू युवतियोंको उठाकर उनसे दुष्कर्म किया जाता है परन्तु विचित्र है कि नसरुद्दीन शाहजीको अभी गत कुछ ३-४ वर्षोंमें ही देशमें धर्मके नामपर घृणा व अन्धकार दिखाई दिया है !! क्या ऐसे निधर्मी व स्वार्थी अभिनेता हमारे सम्मानके पात्र हो सकते हैं ?, स्वयं विचार करें ! ”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान



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