जनवरी ८, २०१९
लोकसभामें नागरिक संशोधन विधेयक २०१६ (सिटीजन एमेंडमेंट बिल) पारित हो गया है । इसपर वार्ताके समय केन्द्रीय गृहमन्त्री राजनाथ सिंहने कहा कि मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि नागरिकता संशोधन विधेयक केवल असमके लिए या किसी विशेष देशसे आने प्रवासियोंके भलेके लिए नहीं है । यह विधेयक उन प्रवासियोंके लिए भी है, जो पश्चिमी सीमाओंसे आए हैं और राजस्थान, पंजाब और देहलीमें रह रहे हैं । वार्ताके समय कांग्रेस सांसदों लोकसभासे बाहर चले गए !
राजनाथ सिंहने कहा कि हम ‘एनआरसी’के प्रति कटिबद्ध हैं । इसमें किसी भी प्रकारका भेदभाव नहीं किया जाएगा । अवैधानिक ढंगसे देशमें आनेवाले लोगोंसे (प्रवासियों) निपटनेके लिए सभी आवश्यक पग उठाए जाएंगें । उन्होंने कहा कि असमके लोगोंके अधिकार, संस्कृति और आयके साधन सुरक्षित हैं । ‘एनआरसी’में कोई भेदभाव नहीं है ।
राजनाथने कहा कि शासन असम और बोडों लोगोंके प्रकरणको उठा रहा है । शासनने लम्बे समयसे लम्बित प्रकरणके निवारणके उपाय किए हैं । वहीं कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खडगेने मांग की कि इस विधेयकको चयन समितिके (सेलेक्ट कमेटी) पास भेजना चाहिए । उन्होंने असममें उपद्रवों और विरोधका सन्दर्भ भी दिया । लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजनने कांग्रेसकी मांगको अस्वीकृत करते हुए कहा कि इसे पुनः चयन समितिको नहीं भेजा जा सकता है । इसके पश्चात कई सांसदोंने विधेयकके विरुद्ध नारेबाजी की । इसके पश्चात कांग्रेस सांसद सदनसे बाहर चले गए !
“नागरिक संशोधन विधेयक पारित करना भर आवश्यक नहीं है, उसपर कार्यवाहीकर असम, बंगाल और अन्य पूर्वी व उत्तरी भागोंमें उत्पात करनेवाले बांग्लादेशी धर्मान्धोंको बाहर करना व पीडित हिन्दुओंको सम्मानपूर्वक आश्रय देना भी आवश्यक है । शासन यह भी सुनिश्चित करे कि जो रोहिंग्या अवैध प्रमाणपत्र बनवाकर यहां रह रहे हैं, उनका अभिज्ञानकर वापस भेजा जाए, अन्यथा इसका कोई लाभ नहीं होगा !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान
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