जनवरी ७, २०१९
असमके वरिष्ठ मन्त्री हिमन्त बिस्व शर्माने सोमवार, ८ जनवरीको कहा कि यदि नागरिकता (संशोधन) विधेयक पारित नहीं हुआ तो अगले पांच वर्षोंमें राज्यके हिन्दू अल्पसंख्यक बन जाएंगें ! राज्यके वित्त मन्त्रीने कहा, ‘‘मुझे पूर्ण विश्वास है कि यदि यह विधेयक पारित नहीं हुआ तो असमी हिन्दू केवल पांच वर्षोंमें ही अल्पसंख्यक बन जाएंगें । यह उन तत्त्वोंके लिए लाभप्रद होगा, जो चाहते हैं कि असम दूसरा कश्मीर बन जाए ।’’ शर्माकी यह टिप्पणी नागरिकता (संशोधन) विधेयकको लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनोंकी पृष्ठभूमिमें आयी है । ‘नागरिकता अधिनियम, १९५५’में संशोधनके लिए लोकसभामें यह विधेयक प्रस्तुत किया गया है । अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेशसे अल्पसंख्यक समुदायके लोगोंको भारतमें १२ वर्षोंके स्थानपर छह वर्ष निवास करनेके पश्चात ही नागरिकता प्रदान करनेकी मांग की गई है । ऐसे लोगोंके पास कोई उचित प्रमाणपत्र नहीं होनेपर भी उन्हें नागरिकता दी जा सकेगी । अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेशमें हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायके लोग अल्पसंख्यक हैं । पूर्वोत्तरमें लोगोंकी एक बडी संख्या और कई संगठन विधेयकका विरोध कर रहे हैं ।
“असममें गत वर्षोंसे रोहिंग्या मुसलमानों व अन्य बांग्लादेशियोंकी संख्यामें अत्यधिक वृद्धि हुई है, जो धर्मान्धोंद्वारा किए गए उपद्रवोंके रूपमें सामने आई है, जिससे वहांके हिन्दू भयभीत है । ऐसेमें नागरिक संशोधन विधेयक पारित करना एक उचित पग है; परन्तु केद्र शासन यह भी सुनिश्चित करे कि अवैध रूपसे रह रहे धर्मान्ध भी राज्यसे बाहर हों ताकि वहां शान्ति स्थापित की जा सकें !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : नभाटा
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