देवनदीकी दुर्दशा, राहमें आनेवाले ६६ नाले गिरते हैं गंगामें !!


जनवरी १०, २०१९

स्वच्छ भारत और गंगा स्वच्छताके अभियानके पश्चात भी अंकोंमें स्थिति विकट बनी हुई हैं । सभी दावे धरातलपर रिक्त दिख रहे हैं । स्थिति यह है कि ९७ मेंसे ६६ मण्डलोंका (नगरोंका) कमसे कम एक नाला नदीमें खुलता है ! मोदी शासनमें मन्त्रालय बनाए जानेके पश्चात भी गंगा पावन नहीं हो पा रही है ! गंगाकी सबसे बुरी स्थिति पश्चिम बंगालमें है, इसमें दूसरे क्रमांकपर आश्चर्यजनक रूपसे भाजपाई राज्य उत्तर प्रदेश है ।


पश्चिम बंगालमें गंगासे सटे लगभग ७८ प्रतिशत मण्डलोंके नाले सीधे नदीमें गिरते हैं ! पांच राज्योंके किनारे बसे सभी ९७ मण्डलोंमें हुए तीसरे पक्षकी जांचसे यह विवरण सामने आया हैं । इसके अनुसार, कुल मिलाकर ६६ मेंसे ३१ पश्चिम बंगालमें थे ! गंगाके किनारे बसे सबसे अधिक मण्डल (४०) पश्चिम बंगालमें हैं । पश्चिम बंगालके पश्चात दूसरे क्रमांकपर उत्तर प्रदेश है, जहांके २१ मण्डल गंगा किनारे स्थित हैं और इसमें बिहार (१८), उत्तराखण्ड (१६) और झारखण्ड (२) राज्य भी आते हैं ।

गंगाकी स्थिति दिखानेवाले विवरण ‘क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया’की लगभग ६ सप्ताहकी जांचके पश्चात सामने आए हैं । यह सर्वेक्षण १ दिसम्बर २०१८ से १५ दिसम्बर २०१८ तक किया गया । इस सर्वेक्षणमें ‘मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर’द्वारा निर्धारित किए गए चार प्राथमिकतावाले स्थानोंको केन्द्रित किया गया । सर्वेक्षणमें स्वच्छता, कचरा संचालक सेवाएं, निकासी व्यवस्था और स्थानीय स्तरपर बने ‘सॉलिड वेस्ट प्लांट’को सम्मिलित किया गया ।

विवरणके अनुसार, गंगा बेसिनके केवल १९ मण्डलोंमें एक नगरपालिका ‘सॉलिड वेस्ट प्लांट’ था । यह भी सामने आया कि ३३ स्थानोंके कमसे कम एक घाटपर ठोस कचरा है ! इसके अतिरिक्त ७२ मण्डलोंमें प्राचीन कचरा डालनेके स्थान हैं !! उत्तर प्रदेशके प्रयागराज, रामनगर, और कानपुर सहित १३ नगरोंके नाले सीधे गंगामें गिरते हैं !! उत्तराखण्डके हरिद्वार और ऋषिकेश सहित १० नगरोंमें भी ऐसी ही स्थिति है !

बिहारके ५६ प्रतिशत गंगा किनारे बसे नगरोंके नाले सीधे गंगामें खुलते हैं । इसने निकलनेवाले कचरेको रोकनेके लिए किसी भी नालेपर जालियां या अन्य उपकरण नहीं लगाए गए । जबकि पश्चिम बंगालके लगभग तीन प्रतिशत नगरोंके गिरनेवाले नालोंसे निकलने वाले कचरेको रोकनेकी व्यवस्था की गई है, वहीं राज्यके तीन प्रतिशत नालोंके कचरोंको रोकनेके लिए लगाए गए उपकरण अयोग्य हो गए हैं !

 

 

“गंगाकी दुर्दशाके उत्तरदायी केवल हम ही है ! सर्वप्रथम हम धर्माभिमान न होनेके कारण देवनियोंमें कचरा फेंकते हैं, कुछ धर्मधुरन्धर तो गंगा स्नान भी साबुन आदि लगाकर करते हैं और उसके पश्चात सांसदों व नेताओंसे उत्तर मांगनेके स्थानपर उन्हें तारनहार मानकर मौन धारण कर लेते हैं । परिणाम सबके समक्ष है कि हिन्दुवादी शासन होनेपर भी गंगाकी स्थिति वैसी ही है; अतः अब हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना अनिवार्य है, जहां नागरिक व राजा दोनों ही धर्मनिष्ठ होंगें”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : जनसत्ता



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