जनवरी १४, २०१९
उडीसामें मंगलवार, १५ जनवरीको होनेवाली प्रधानमन्त्री नरेद्र मोदीकी यात्रा अभीसे विवादोंमें घिर गई है । बालंगीरमें उनकी यात्राको देखते हुए १००० वृक्ष काट डाले गए हैं ! बताया जा रहा है कि मोदीकी सुरक्षा और उनके हेलिकॉप्टरको उतारनेके लिए पेडोंको काटना पडा है । ‘द हिंदू’के अनुसार, प्रधानमन्त्री मोदीके हेलिकॉप्टरको उतारनेके लिए पेडोंकी कटाई की गई है । इसके घटनाके पश्चात पर्यावरणविदोंने इसका विरोध किया है ।
सूचनाके अनुसार, वर्ष २०१६ में ‘नगरीय पौधा-रोपण’ कार्यक्रमके अन्तर्गत रेलवेकी अधिकार क्षेत्रवाली २.२५ हेक्टेअर भूमिपर काफी पौधे लगाए थे । मोदीकी यात्राको देखते हुए अधिकारियोंने रिक्त भूमि यहां देखते हुए ‘हेलिपैड’के अस्थाई निर्माणकी आज्ञा दे दी ।
ध्यान करनेवाली बात यह है कि ‘हेलिपैड’ निर्माणके लिए अधिकारीयोंसे भूमि तो मिल गई; परन्तु, वृक्षोंको काटनेकी अनुमति वन विभागसे नहीं ली गई । ‘द हिंदू’के अनुसार, वन विभागने माना है कि आरम्भिक जांचमें वृक्षोंके कटानकी बात पूर्ण रूपसे सत्य है और इसके लिए विभागसे भी पूछताछ की; परन्तु उन्होंने केवल यह कहा कि ‘हैलीपेड’के निर्माण और सुरक्षाको देखते हुए तत्काल रूपसे वृक्षोंको काटना पडा ।
बताया जा रहा है कि काटे गए वृक्षोंकी लम्बाई ७ फुट और उनके बने रहनेका औसत ९० प्रतिशत था ! वन विभागने १००० से लेकर १२०० के मध्य वृक्षोंकी कटाईकी बात स्वीकार की है । पर्यावरणविदोंका कहना है कि वृक्षोंको काटनेसे पूर्व सम्बन्धित विभागसे पहले अनुमति लेनी चाहिए थी । इस मध्य जनपदके एसपीने बताया कि सुरक्षाको देखते हुए पेडोंको काटना आवश्यक था; क्योंकि वहांपर हेलीकॉप्टर उतारनेके लिए रिक्त स्थान नहीं था । उल्लेखनीय है कि कार्यक्र्मके अनुसार, मंगलवारको प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी खुर्दा-बालगीर रेलवे लाइनपर रेलयानको हरी झंडी दिखाकर रवाना करनेवाले हैं । इस मध्य वह बालंगीरमें एक जनसभाको भी सम्बोधित करेंगें ।
“प्राचीन समयसे ही सनातन संस्कृतिमें वृक्षोंको देवी-देवताओंका निवास स्थल बताया गया है । आजके राजनेता निज स्वार्थपूर्ति व तथाकथित विकासके लिए अन्धाधुन्ध वृक्षोंको काट रहे हैं, जलवायु परिवर्तनके रूपमें जिसके परिणाम भी अब सामने आने लगे हैं । क्या राज्यकर्ताओंको पर्यावरणका मूल्य सब कुछ नष्ट होनेके पश्चात समझ आएगा ? यह सामान्य ज्ञानकी बात है कि यदि हैलिकॉप्टर उतारना है तो वह कहीं भी उतरवाया जा सकता है, नेताका भाषण १ घण्टा चलता है; परन्तु एक वृक्ष बढनेपर वर्षों लग जाते हैं ! क्या प्रशासन इसकी आपूर्ति कर पाएगा ? दुखद है कि आजके तमोगुणी राज्यकर्ताओंमें यह सरलसा तथ्य समझ भी नहीं है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जनसत्ता
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