जनवरी १४, २०१९
तिरुवनन्तपुरममें पदस्थ रक्षा प्रवक्ता के. धान्या सनल ‘अगस्तर्कुडम पहाडी’पर पहुंचनेवाली प्रथम महिला बन सकती हैं, उन्होंने इसपर आरोहण (चढाई) आरम्भ कर दिया है । केरल उच्च न्यायालयने गत वर्ष यहां ‘ट्रैकिंग’की अनुमति दी थी । यहां ब्रह्मचारी अगस्त ऋषिकी समाधि है । ऐसेमें यहां महिलाओंके जानेपर प्रतिबन्ध था । महिलाओंके पर्वतारोहण आरम्भ करनेपर यहां विरोध हो रहा है ।
धान्याने कहा कि मैं समाधि स्थलपर नहीं जाऊंगी ।
धान्याका कहना है कि वे केवल पर्वतपर आरोहणके लिए जा रही हैं । आदिवासियोंकी भावनाओंका सम्मान करते हुए समाधि स्थलपर नहीं जाएंगी ।
अगस्तर्कुडममें यह पर्वतारोहण सोमवार, १४ जनवरीसे ही आरम्भ हुआ है । इस बार यहां चढाईके लिए ४७०० लोगाेंने पञ्जीकरण कराया है, जिमें १०० महिलाएं हैं ।
कानी जनजातिके अनुसार यह पर्वतमाला उनके देवता ‘अगस्त्य मुनि’का निवास स्थल है । हिन्दू धार्मिक कथाके अनुसार ऐसा माना जाता है कि अगस्त्य मुनि इस समुदायके संरक्षक हैं ।
“हिन्दुओंके आस्थाकेन्द्र कोई भ्रमणीय स्थल नहीं है, वे तीर्थ है, जो इसे नष्ट करने हेतु भ्रमणके लिए खोल दिया जाए और इसका उदाहरण हम अन्य तीर्थोंसे ले सकते हैं कि जिस-जिस तीर्थका व्यापारीकरण किया गया, वहां सात्विकताका कितना ह्रास हुआ है !; परन्तु न्यायालय सदैव ही हिन्दूद्रोही निर्णय देते आए हैं । वहांके आदिवासी समुदायतक इसका विरोध कर रहे हैं, वहांकी महिलाएं इस परम्पराका पालन करती आईं हैं; परन्तु आजकी धर्महीन महिलाओंको यह दिखाई नहीं देता है ! क्या तथाकथित पर्वतारोहणके लिए एक हिन्दू तीर्थस्थलको नष्ट किया जा सकता है ? गत दिवसोंमें सबरीमालाकी परम्पराओंपर प्रहार और अब अगस्त्यमुनिके स्थलपर, इससे ही हिन्दुओंके प्रति विषकारी मानसिकताका बोध होता है और अब केवल हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनासे ही तीर्थ स्थलोंका संरक्षण सम्भव है ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : भास्कर
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