काटजूने बरखा दत्त और शेखर गुप्ताका सत्य उद्घाटित किया, न्यायाधीश सीकरीको लेकर प्रसारित रहे थे फर्जी समाचार !!


जनवरी १४, २०१९

आजके कुछ पत्रकार अपने स्वामियोंका हित साधनेके लिए देशसे लेकर प्रत्येक उस लोकतान्त्रिक स्वायत्त संस्थानके अधिकारियोंके विरुद्ध अनुचित समाचार (फेक न्यूज) गढने और प्रसारित करनेमें लग जाते हैं । इसका प्रमाण है, आलोक वर्माको सीबीआईके निदेशक पदसे हटाए जानेको लेकर पूर्व न्यायाधीश एके पटनायकसे लेकर वर्तमान न्यायाधीश एके सिकरीके विरुद्ध ‘फेक न्यूज’ प्रसारित करना । यद्यपि इस बार पत्रकारोंकी विचारधाराके उच्चतम न्यायालयके ही पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजूने अपने ट्वीट तथा आलेखसे इस प्रकरणमें पत्रकारोंको ‘फेक न्यूज मेकर’ सिद्ध कर दिया है ।


उल्लेखनीय है ‘इंडियन एक्सप्रेस’में प्रकाशित एक आलेखमें आलोक वर्माको उनके पदसे हटानेको लेकर मोदी शासनको अपमानित करनेके लिए पत्रकारोंने पूर्व न्यायधीश एके पटनायकके एक ऐसे वक्तव्यका सन्दर्भ दिया, जो उन्होंने कभी दिया ही नहीं ! ‘इंडियन ए्क्सप्रेस’में प्रकाशित आलेखमें जस्टिस पटनायकके वक्तव्यके सन्दर्भसे लिखा गया है कि सीबीआई निदेशक आलोक वर्माके विरुद्ध भ्रष्टाचारका कोई साक्ष्य नहीं मिला है ।

मार्कंडेय काटजूने अपने ‘ट्वीट’में लिखा है कि ‘इंडियन एक्सप्रेस’में जस्टिस पटनायकके वक्तव्यपर आधारित आलेख पूर्ण रूपसे ‘फेक न्यूज’ है । उन्होंने ‘द वीक’में एक लेख भी लिखा है । उन्होंने लिखा है कि आलेख लिखनेसे पूव किसी पत्रकारने जस्टिस पटनायकसे बात तक करना उचित नहीं समझा । यह बात स्वयं जस्टिस पटनायकने काटजूको बताई । काटजूने लिखा है कि क्या हमारी पत्रकारिताकी नैतिकताका ये अधोपतन नहीं है कि जिसका वक्तव्य उद्धृत कर रहे हैं, उससे एक बार बात कर लें ? जस्टिस काटजूके इतने तथ्य सामने रखनेके पश्चात भी बरखा दत्तने काटजूपर शंका प्रकट करनेसे पीछे नहीं हटी; परन्तु उन्होंने बरखा दत्त और शेखर गुप्ताको अपने तथ्यसे प्रखर उत्तर दिया ।

 

आलोक वर्माको उनके पदसे हटाया क्या गया, पत्रकारोंने आलोक वर्माके विरुद्ध अपना मत देनेवाले जस्टिस सिकरीका विरोध करना आरम्भ कर दिया है । उनपर इस निर्णयके कारण ‘सीसैट’का सदस्य बनाए जानेकी ‘फेक न्यूज’ चलाकर उन्हें अपमानित किया जा रहा है । ज्ञात हो कि एक ‘शहरी नक्सली’के पति सिद्धार्थ वरदराजनने अपने जालस्थल ‘द प्रिंट’में जस्टिस सिकरीके विरुद्ध झूठा अभियान चला रखा है । जस्टिस सिकरीके विरुद्ध ‘द प्रिंट’में प्रकाशित आलेखको भी मार्कंडेय काटजूने ‘फेक न्यूज’ बताया है ।

उन्होंने बरखा दत्तको उत्तर देते हुए सिकरीका भ्रमणभाष क्रमांक और ‘ईमेल’ भी अपने ‘ट्वीट’में लिख दिया है, ताकि किसीमें साहस हो तो उनसे बातकर उनका पत्र जान लें । इतना ही नहीं जस्टिस काटजूने सिकरीको एक सत्यनिष्ठ तथा निष्ठावान न्यायाधीश बताते हुए देशके श पत्रकारोंको दर्पण दिखाया है । उन्होंने कहा है कि हमारे देशके समाचार माध्यमोंमें कुछ ऐसे पत्रकार हैं, जो अपने निहित स्वार्थकी पूर्तिके लिए उन्हें कुख्यातकर उनकी छविको कलंकित करनेके प्रयासमें लगे हैं ।

 

“आजके कुछ पत्रकारों व पत्रकारिताका नैतिक स्तर इतना नीचे आया है कि पत्रकार ही स्वयं न्यायाधीश बनकर निर्णय सुनाते हैं, किसीके मान-अपमानसे उन्हें लेना-देना ही नहीं है ! ‘टीआरपी’के लिए किसीपर अनर्गल दोषारोपण करना, हिन्दुओंका अपमान करना ये सब माध्यम बनते जा रहे हैं । हिन्दुओंके विरुद्ध प्रकरण हो तो कुछ पत्रकार मुखर होकर बोलते हैं और जब बात किसी अन्यकी आती हो तो मौन धारण कर लेते हैं ! ऐसी स्थितिमें क्या ऐसे पत्रकारोंको स्वतन्त्रताका आश्रय लेकर राष्ट्रमें अवधारणा उत्पन्न करने दी जानी चाहिए ? स्वयं विचार करें !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

स्रोत : इपोस्टमोर्टेम



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