उत्तिष्ठ कौन्तेय !


देशद्रोही कन्हैयाके पक्षमें उतरे सिब्बल, कहा- देशद्रोहके कानूनको समाप्त किया जाए
कांग्रेसके वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बलने देशद्रोहसे जुडी ‘भारतीय दण्ड संहिताकी धारा ‘१२४ए’को समाप्त करनेका समर्थन करते हुए बुधवार, १६ जनवरीको कहा कि वर्तमानमें इस औपनिवेशिक कानूनकी आवश्यकता नहीं है ।
उनका यह वक्तव्य उस समय आया जब ‘जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय’में (जेएनयूमें) दो वर्ष पहले हुई कथित उद्घोष (नारेबाजीके) प्रकरणमें देहली पुलिसने हाल ही में कन्हैया कुमार और अन्यके विरुद्ध आरोपपत्र प्रविष्ट किया है, जिसमें धारा ‘१२४ए’ भी लगाई गई है । सिब्बलने ट्वीट किया, “देशद्रोहके कानूनको (‘आईपीसी’की धारा ‘१२४ए’को) समाप्त किया जाए, यह औपनिवेशिक है ।”
उन्होंने कहा, “खरा देशद्रोह तब होता है जब सत्तामें बैठे लोग संस्थाओंके साथ छेडछाड करते हैं, कानूनका दुरुपयोग करते हैं, हिंसा भडकाकर शांति एवं सुरक्षाकी स्थिति खराब करते हैं।”  सिब्बलने कहा, “इन लोगोंको २०१९ (लोकसभा चुनाव) में दंडित करें। सरकार बदलो, देश बचाओ ।”
*ये हैं आजके विधि विशेषज्ञ और राजनेता ! देशद्रोह इनके लिए अपराध नहीं है, कन्हैया कुमार जैसे राष्ट्रद्रोही और हिन्दू धर्मद्रोही वक्तव्य करनेवाले युवाओंको कुमार्गपर ले जानेवालेका ये समर्थन तो करते ही हैं, ये समाजको अराजकताकी ओर कैसे ले जा सकते हैं ?, उसका भी अपनी भ्रष्ट बुद्धिसे सुझाव देते हैं ! देशद्रोह, इनके लिए अपराध नहीं है, ऐसे लोग यदि न्यायपालिकामें या राजनीतिमें अधिक समय रहें तो इस देशका क्या होगा ?, आप स्वयं सोचें ! कांग्रेस एक देशद्रोही दल है, उसके कृत्य आरम्भसे ही अंग्रेजोंका परोक्ष रूपसे समर्थन करती रही है; किन्तु अब तो उनकी देशद्रोही वृत्ति प्रत्यक्ष रूपमें प्रकट होने लगे हैं या  उनके नेतागण अपने देशद्रोही वक्तव्योंसे प्रकट करने लगे हैं ! हमारी वृत्ति अनुरूप ही हमारी कृति या वक्तव्य या विचार प्रक्रिया होती है ! कांग्रेसियोंकी वृत्ति अब समाजमें प्रकट होने लगी है ! कहते हैं, सौ दिनका चोर एक दिन पकडा जाता है, मात्र डेढ शतकमें कांग्रेसियोंके संस्कार अब सबके समक्ष उभरकर आने लगे हैं ! यदि यह धारा औपनिवेशिक है तो उसमें सुधार किया जा सकता है; किन्तु देशद्रोहको अपराध न माना जाए और देशद्रोहियोंको दण्डित नहीं किया जाए, यह तो किसी भी राष्ट्रका कानून बने, यह कभी संभव है क्या ? अब आपको समझमें आ रहा है कि निधर्मी शिक्षण नीतिसे कैसे बुद्धिभ्रष्ट लोग उत्पन्न होते हैं, कोई न्यायाधीश निर्णय देता है कि समलैंगिकता अपराध नहीं, तो कोई कहता है, विवाहेत्तर सम्बन्ध अपराध नहीं तो कोई कहता है, शबरीमालामें महिलाओंका प्रवेश होना ही चाहिए ! काले वस्त्र पहन-पहनकर इन सब बुद्धिजीवियोंकी बुद्धि तमोगुणी हो गई है, धर्म और अधर्ममें भेद करनेकी क्षमता समाप्त हो गई है ! विवेक नष्ट हो चुका है ! मात्र अपना या अपने दलका स्वार्थ इन्हें दिखाई देता है, ऐसे लोग धिक्कारके पात्र हैं !  ऐसे लोगोंसे समाजको बचाने हेतु शीघ्र अति शीघ्र हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना करना अति आवश्यक हो गया है ! अन्यथा ये सारे बुद्धिभ्रष्ट लोग इस देश और संस्कृति दोनोंका ही सर्वनाशकर, दानवी साम्राज्यकी स्थापना कर देंगे ! – तनुजा ठाकुर


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