जनवरी १७, २०१९
छत्तीसगढके शासकीय विद्यालयमें बच्चोंको मिलनेवाले मध्याह्न भोजन योजनाकी (मिड-डे-मिलके) भोजनसूचिमें (मेनूमें) परिवर्तन करनेका निर्णय शासनने लिया है । अब सूचिमें अंडा भी सम्मिलित किया जाएगा । बच्चोंको उत्तम पोषण देनेके उद्देश्यका सन्दर्भ देते हुए ये निर्णय लिया गया है । ५९ विद्यालयोंमें सर्वेक्षणके पश्चात यह निर्णय लिया गया है । नई व्यवस्था शीघ्र ही लागू करनेकी तैयारी शासनद्वारा की जा रही है ।
प्रदेशके विद्यालय शिक्षा मन्त्री प्रेमसाय सिंह टेकामने न्यूज१८ से चर्चामें कहा कि ५९ विद्यालयोंके सर्वेक्षणके पश्चात सूचिमें परिवर्तनका निर्णय लिया गया है । बच्चोंके उत्तम पोषणके लिए अंडे दिए जाएंगे । ऐसे बच्चे जो अंडा नहीं खाते हैं, उन्हें पोषणके दूसरे आहार जैसे सोयाबीन, दूध या अन्य समाग्री दी जाएगी । मन्त्री टेकामने कहा कि व्यवस्था विद्यालयोंमें शीघ्र ही आरम्भ होगी । इसके लिए आवश्यक दिशा निर्देश दे दिए गए हैं ।
उल्लेखनीय है कि गत भाजपा शासनने अंडेको मांसाहारकी श्रेणीमें रखते हुए इसे सूचिमें सम्मिलित नहीं किया था ।
“दूध, घी, सहस्रों शाक व फलोंके देशमें क्या अब केवल अण्डा ही बच्चोंको शक्ति प्रदान कर सकता है ? यह छत्तीसगढ शासनकी मूढताको ही दर्शाता है । कहा गया है कि ‘जैसा खाओ अन्न, वैसा रहे मन’ और अण्डा एक तामसिक भोज है, जो बालकोंको नहीं देना चाहिए; परन्तु मैकॉले शिक्षित हिन्दुओंको बुद्धिजन्य कोई बात समझ ही नहीं आती है । विदेशी अण्डा खाते हैं; क्योंकि वहां प्रकृतिने कुछ प्रदान नहीं किया है; परन्तु भारत, जहां प्रकृतिने सभी पोषक तत्त्वोंके लिए शाकाहारी विकल्प प्रदान किए है, वहां आजके मूढ हिन्दू अण्डा खाते हैं और सबसे बडी विडम्बना है कि जिन गांवोंमेंं शक्करकन्द व फलोंके चाटके ठेले लगते थे, आज वहीं ठेलोंपर अंडे देखनेको मिलते हैंं !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : न्यूज १८
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