शाह फैसलकी पृथकतावादियोंकी भाषा, कन्हैया और अन्यके विरुद्घ देशद्रोहके आरोप लगाना अभिव्यक्तिकी स्वतन्त्रताका उपहास !


जनवरी १६, २०१९

पूर्व ‘आईएएस’ अधिकारी शाह फैसलने बुधवार, २६ जनवरीको कहा कि जेएनयू प्रकरणमें कन्हैया कुमार एवं अन्यके विरुद्घ देशद्रोहका विधान लगाया जाना अभिव्यक्तिकी स्वतन्त्रताका उपहास है । जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघके पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार एवं नौ अन्य छात्रोंके विरुद्घ कथित रूपसे देश विरोधी उद्घोष (नारे) लगानेके लिए देहली पुलिसने सोमवारको उनके विरूद्ध देशद्रोहका आरोप लगाया है । फैसलने ट्वीट किया, ‘‘कन्हैया कुमार एवं आठ अन्यके विरुद्घ देशद्रोह लगाया जाना अभिव्यक्तिकी स्वतन्त्रताका उपहास है । ‘भादंसं’की धारा-१२४ समयको देखते हुए निराधार हो चुकी है । विश्व आगे बढ गया है । समय आ गया है, जब हमारे शासनको परिपक्वता दिखानी चाहिए ।’’ आरोपियोंमें सात कश्मीरी सम्मिलित हैं । १२०० पृष्ठोंवाले इस आरोपपत्रमें आरोप लगाया गया है कि संसदपर आक्रमणके दोषी अफजल गुरूको फांसीपर चढाए जानेकी घटनाकी स्मृतिमें जेएनयू परिसरमें नौ फरवरी २०१६ को हुए कार्यक्रममें कथित रूपसे भारत विरोधी उद्घोष लगाये गए ।

 

“जिस अभिव्यक्तिकी स्वतन्त्रताकी बात धर्मान्ध फैजल कर रहे हैं, उसीके कारण ही साधु-सन्यासियोंको पोषित करनेवाला भारत आज समस्त राष्ट्रद्रोहियों व निधर्मियोंको पोषित कर रहा है । कोई भी राष्ट्रविरुद्ध वमनकर अभिव्यक्तिकी स्वतन्त्रताका नाम लेकर बच निकलता है । यह परिस्थिति हमें भयावह परिणामकी ओर ले जा सकती है ! विश्वका कोई भी देश ऐसे राष्ट्रद्रोहियोंको पोषित नहीं करता है; परन्तु स्वतन्त्रता पश्चात निधर्मी राज्यकर्ताओंके तुष्टिकरणका परिणाम देश अबतक भोग रहा है”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : नभाटा



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