उच्चतम न्यायालयके न्यायाधीश बोले, देहली अब रहने योग्य नहीं !


जनवरी १८, २०१९


एक वो समय था जब लोग अपने गांवको छोडकर देशकी राजधानी देहली आना चाहते थे; परन्तु गत कुछ वर्षोंमें नगरकी ऐसी स्थिति हो गई है कि लोग यहांसे भागनेको आतुर हैं !

न्यायाधीश अरुण मिश्राने देहलीमें बढ रहे प्रदूषणपर चिंता प्रकट करते हुए कहा, “देहलीमें जिसप्रकार की स्थिति हैं, उससे स्पष्ट लग रहा है कि ये नगर अब रहने और कार्य करने योग्य नहीं रहा ! मुझे आरम्भमें तो देहली अच्छा लगा; परन्तु अब ये प्रदूषित गैसका भण्डार बनती जा रही है । अब यह आकर्षित नहीं करती । सेवानिवृत्त होनेके पश्चात मैं यहां नहीं रहना पसंद करूंगा !” अरुण मिश्राने ये बातें दिनेश माहेश्वरी और संजीव खन्नाके शपथ ग्रहण समारोहमें कहीं ।

न केवल प्रदूषण, वरन न्यायाधीश अरुण मिश्रा देहलीमें जामकी समस्यासे भी उद्विग्न हैं । मिश्राने कहा, “जामके कारण आज मुझे नूतन न्यायाधीशोंके शपथ ग्रहण समारोहमें पहुंचनेमें देरी होने वाली थी । जामसे कार्यस्थलपर पहुंचनेमें प्रतिदिन ही देर हो जाती है !”

न्यायाधीश मिश्राने देहली शासनसे विनती की है कि वो अगले १० दिवसोंके भीतर देहली और मेरठके मध्य ‘रैपिड ट्रेन’पर विचार करें और इसकी जानकारी न्यायालयको दें ।

देहलीमें प्रदूषणके स्तरको देखकर इससे पूर्व भी देहली उच्च न्यायालय टिप्पणी कर चुका है । वर्ष २०१५ में भी दिल्ली उच्च न्यायालयने टिप्पणी की थी कि राष्ट्रीय राजधानीमें वायु प्रदूषणका वर्तमान स्तर ‘चिंताजनक’ स्थितितक पहुंच गया है । न्यायालयने प्रदूषणकी समस्यासे निपटनेके लिए केन्द्र और देहली शासनको विस्तृत कार्य योजना प्रस्तुत करनेका भी निर्देश दिया था ।

 

“देहलीकी इस स्थितिके पीछे हमारा स्वार्थ और मूढता ही है ! यहां प्रत्येक कोई नूतन वाहन लेकर सडकोंपर उतरना चाहता है ! वृक्षोंको काटकर भवन खडे कर दिए गए हैं, जिसकी संख्या बढती ही जा रही है ! लोग स्वार्थवश अपने मूल ग्रामको छोडकर देहलीमें आ बसे है और इस प्रकरणमें शासकीय तन्त्र भी पूर्ण रूपेण उत्तरदायी है । भ्रष्टाचारसे प्रेरित निर्माण विभागने यत्र-तत्र अवैध निर्माण करवाए हैं और स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि अब इसका कुछ भी करना सम्भव नहीं !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

स्रोत : आजतक



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


सूचना: समाचार / आलेखमें उद्धृत स्रोत यूआरऍल केवल समाचार / लेख प्रकाशित होनेकी तारीखपर वैध हो सकता है। उनमेंसे ज्यादातर एक दिनसे कुछ महीने पश्चात अमान्य हो सकते हैं जब कोई URL काम करनेमें विफल रहता है, तो आप स्रोत वेबसाइटके शीर्ष स्तरपर जा सकते हैं और समाचार / लेखकी खोज कर सकते हैं।

अस्वीकरण: प्रकाशित समाचार / लेख विभिन्न स्रोतोंसे एकत्र किए जाते हैं और समाचार / आलेखकी जिम्मेदारी स्रोतपर ही निर्भर होते हैं। वैदिक उपासना पीठ या इसकी वेबसाइट किसी भी तरहसे जुड़ी नहीं है और न ही यहां प्रस्तुत समाचार / लेख सामग्रीके लिए जिम्मेदार है। इस लेखमें व्यक्त राय लेखक लेखकोंकी राय है लेखकद्वारा दी गई सूचना, तथ्यों या राय, वैदिक उपासना पीठके विचारोंको प्रतिबिंबित नहीं करती है, इसके लिए वैदिक उपासना पीठ जिम्मेदार या उत्तरदायी नहीं है। लेखक इस लेखमें किसी भी जानकारीकी सटीकता, पूर्णता, उपयुक्तता और वैधताके लिए उत्तरदायी है।

विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution