जनवरी १८, २०१९
नोबल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेनने राम मंदिर सहित कई अन्य मुद्दोंको लेकर मोदी शासनपर लक्ष्य साधा है । अमर्त्य सेनने कहा है कि राम मंदिरको भूतकालका असाधारण निर्माण बताने और माननेवाले ‘सनकी’ लोगोंकी कमी नहीं है ! उन्होंने कहा कि लोगोंका वृत्तिहीनता (बेरोजगारी) जैसे मुख्य मुद्दोंसे ध्यान भटकानेके लिए केन्द्र राम मंदिर जैसे मुद्दोंका प्रयोग कर रही है ।
उन्होंने कहा, “वह राम मंदिर जो कि ज्ञात नहीं कि था भी या नहीं ?, किसीने देखा या नहीं देखा ? ज्ञात नहीं बादमें वहां मस्जिद बनाई गई, जिसे तोड दिया गया और इसके पश्चात रामकी कहानीको चारों ओर प्रसारितकर इसे इतिहासका भाग बना दिया गया ! इसीलिए मै कहता हूं कि यह सारी बातें मुख्य मुद्देसे ध्यान भटकानेके लिए है !”
सेनने अपने विचार रखते हुए कहा, “वृत्तिहीनता जैसे वास्तविक मुद्दोंसे ध्यान भटकानेके लिए आज राम मंदिर, सबरीमाला और गौरक्षा जैसे प्रकरण हैं । आर्थिक प्रगतिकी दर उच्च अवश्य रही है; परन्तु इसके पश्चात निर्धनोंका जीवन अच्छा नहीं हो पाया है । आज लोगोमें मानव-रक्षाके स्थानपर गौरक्षाको लेकर प्रेम देखनेको मिल रहा है । इसीप्रकारसे अधिकाधिक लोग आपको राम मंदिरको लेकर उत्साहित दिखेंगें !”
“धर्म और धन दोनों ही सहगामी है; परन्तु इनमें धर्मका महत्त्व सबसे अधिक है; क्योंकि वह लोक और परलोकमें भी साथ रहता है; परन्तु यह बात कोट-पैंट पहनकर अंग्रेज बने निधर्मियोंको समझ कैसे आ सकती है ?, क्योंकि उन्हें तो सामान्यज्ञानतक नहीं है ! निधर्मी अर्थशास्त्री सेन जिसे अपने क्षेत्र अर्थशास्त्रका ही ज्ञान न हो (वास्तविक अर्थशास्त्री होते तो आज भारतकी यह दुर्दशा नहीं होती); तो मन्दिरपर ज्ञान कैसे होगा ? यह हिन्दू होकर रामपर प्रश्न कर रहे हैं तो ऐसे ही निधर्मी अपने माता-पिताको भी डीएनए परीक्षण करवाकर उन्हें माने तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए । वस्तुतः ये लोग उस कुएंके मेंढककी भांति होते हैं, जो सोचते हैं कि कुएंके बाहरकी भांति सब व्यर्थ बात है । यदि किसीको आयका साधन देकर सेन जैसे लोग निकलते हो तो ऐसे कार्यका क्या लाभ है ? सेनको श्रीरामका धन्यवाद करना चाहिए कि वह उनके देशमें हैं, विश्वास न हो तो किसी इस्लामिक राष्ट्रमें जाकर कोई एक अनर्गल वाक्य बोले तो स्वयं ज्ञात होगा !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : आजतक
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