अपने ही देशमें कश्मीरी पण्डित बने भिक्षुक, कश्मीरमें की भिन्न बस्ती बनानेकी मांग !!


जनवरी १९, २०१९


कश्मीरसे अपने विस्थापनके २९ वर्ष पूर्ण होनेपर कश्मीरी पंडित समुदायके कुछ सदस्य शनिवार, १९ जनवरीको राजघाटपर एकत्र हुए और घाटीमें अपने लिए एक भिन्न बस्ती बनानेकी मांग की ।

उन्होंने कश्मीर घाटी लौटनेका संकल्प लिया और उनकी वापसीकी सुविधाके लिए शासनसे अपना कर्तव्य पूर्ण करनेकी विनती की । आयोजकोंने एक वक्तव्यमें कहा कि उन्होंने कश्मीरी पण्डित विस्थापन दिवस मनाया ।

१९९० में इसी दिवस सशस्त्र आतंकवादियोंके साथ सैकडों प्रदर्शनकारी कश्मीरकी सडकोंपर उतर आए थे और अल्पसंख्यक समुदायके विरुद्घ उद्घोष (नारेबाजी) किए, जो अन्ततः घाटीसे उनके पलायनका कारण बना ।

वक्तव्यमें कहा गया है कि १९ जनवरी १९९० से पूर्व और बादमें कई कश्मीरी पण्डितोंकी हत्या की गई और उन्हें प्रताडित किया गया तथा श्रृंखलाबद्ध ढंगसे अल्पसंख्यक पण्डितोंको लक्ष्य बनाया गया !

विस्थापित कश्मीरी पण्डितोंमेंसे एक मोना राजदानने कहा कि वह रात्रि ‘सम्भवत: हमारे जीवनकी सबसे लम्बी रात्रि थी ।’

उन्होंने कहा, “समूची घाटीसे निकली भीडने कश्मीरमें प्रत्येक एक सडकपर अधिकार कर लिया और वे कश्मीरी पण्डितोंके विरुध्द उद्घोषकर मांग कर रहे थे कि या तो हम उनका साथ दें या घाटी छोड दें !”

निर्वासित कश्मीरी पण्डितोंकी वर्तमान स्थितिपर दुख व्यक्त करते हुए युवा छात्र विवेक रैनाने कहा कि हमारे ५०००० से अधिक लोग शिविरोंमें मर गए ! वे सांपों और बिच्छुओंके लक्ष्य बने ! जम्मूमें अब भी एक शरणार्थी शिविर है, जिसमें २५,००० से अधिक लोग आश्रय लिए हुए हैं और वह किसी यातना केन्द्रसे अल्प नहीं है !!

 

“मुसलमानोंद्वारा किए क्रूर नरसंहारके भोगी व द्रष्टा, भाई-भाई, धर्मनिरपेक्षता और गंगा-जमुनी संस्कृतिके परखच्चे उडते देखनेवाले द्रष्टा, वे कश्मीरी पण्डित भाई-बहन अपने ही देशमें विस्थापितोंका जीवन व्यतीत कर रहे हैं । लुटनेवालोंको सर्व सुविधाएं देकर धारामें लानेका प्रयास करनेवाला हिन्दुवादी व अहिन्दुवादी शासन तन्त्रका कश्मीरी पण्डितोंकी अनदेखी हिन्दुवादियोंको शूल बनकर चुभ रहा है । भाजपा शासनने समस्त वचनकर सत्ता प्राप्त की थी, अब यदि हिन्दू उन्हें चुने तो किस आधारपर ? हिन्दुओंके लिए अब अपने ही राष्ट्रमें आगे कुंआ और पीछे खाई हो गई है !; अतः अब केवल और केवल धर्मराज्यकी स्थापना ही एकमात्र उपाय है ! ”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : फर्स्टपोस्ट



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