बांग्लादेशी धर्मान्धोंके प्रवेशपर मौन रहनेवाले निधर्मी राज्यकर्ताओंका असमके नागरिक संशोधनपर विरोध !!


जनवरी २१, २०१९


भारतीय जनता पार्टीके सहयोगी दल ‘जनता दल युनाइटेड’ने राज्यसभामें ‘नागरिकता संशोधन विधेयक’का विरोध करनेका निर्णय किया है । उल्लेखनीय है कि यह विधेयक जब लोकसभामें प्रस्तुत हुआ था, तब जेडीयूने अपने सभी सांसदोंको इस विधेयकपर मतदानके समय लोकसभासे बाहर रहनेका निर्देश दिया था ।

सूत्रोंके अनुसार, दलके राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशान्त किशोर, राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी और अन्य शीर्ष नेता गणतन्त्र दिवसके तुरन्त पश्चात भाजपाकी पूर्व सहयोगी असम गण परिषदद्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शनमें मंच साझा करेंगें । पटनामें दलके राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहारके मुख्यमन्त्री नीतीश कुमारके दल पदाधिकारियोंके साथ बैठकमें यह निर्णय लिया गया । इसके पूर्व पार्टीने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वह ‘ट्रिपल तलाक’ विधेयकका भी समर्थन नहीं करेगी ।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’के अनुसार, राष्ट्रीय सचिव संजय वर्माने कहा, “विधेयकका विरोध करनेवाले विभिन्न संगठन २७ जनवरीको गुवाहाटीमें एक संयुक्त रैली करेंगें, जबकि असम गण परिषदकी रैली २८ जनवरीको गुवाहाटीमें होनी है । हम दोनों रैलियोंमें सम्मिलित होंगे और जेडी(यू)के समर्थनका विस्तार करेंगें । वे सभी संगठन जो विधेयकका विरोध कर रहे हैं, वो इस रैलीमें सम्मिलित होंगें ।”

‘इंडियन एक्सप्रेस’को राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागीने बताया, “हमने नागरिकता संशोधन विधेयक, २०१६ का विरोध करनेका निर्णय किया है; क्योंकि यह असमकी अस्मिताके विरुद्घ है । दलने मुझे और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोरको २७ जनवरीको गुवाहाटी भेजनेका निर्णय किया है ।”

उल्लेखनीय हो कि गत शीतकालीन सत्रमें नागरिकता संशोधन विधेयक, २०१६ को लोकसभामें विरोधके पश्चात भी बहुमतसे पारित किया गया । इसके पश्चात इस विधेयकका असम तथा उत्तर-पूर्वके कुछ राज्योंमें विपक्षी दलोंने प्रखर विरोध किया था । उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक १९५५ की असम सन्धिका उल्लंघन है; क्योंकि यह अन्य हिन्दुओंको सीमावर्ती देशोंसे वहां रहनेकी अनुमति देगा । उल्लेखनीय है कि इस विधेयकके बननेके पश्चात पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश सहित सीमावर्ती देशोंके हिन्दुओं, सिखों, जैनों, बौध्दोंको बिना किसी बाधाके भारतका नागरिक माना जाएगा । इसके अतिरिक्त शासनने इनके लिए नागरिकता शुल्कको २०,००० से घटाकर मात्र १०० रूपये कर दिया है ।

 

क्या इन दलोंको विधेयकका विरोध करनेमें तनिक भी लज्जा नहीं आती है ? रोहिंग्या मुसलमानों व अन्य धर्मान्धोंके भारतमें प्रवेशपर यही राजनीतिक दल मौन धारण करके समर्थन करते हैं और यदि कुछ हिन्दू देशमें आएंगें तो तुष्टिकरणमें अन्धे हुए इन नेताओंको विरोध सूझ रहा है ! और ऐसा नहीं है ये विरोधी नेता मुस्लिम हैं, ये सभी हिन्दू ही हैं ! हिन्दू बहुल राष्ट्रमें हिन्दुओंके विरोधी इन वोटबैंकके लालची नेताओंका कोई स्थान नहीं होना चाहिए !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

स्रोत : ईपोस्टमोर्टम



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