मन्दिरके शासकीयकरणके दुष्परिणाम, सबरीमालामें शुद्धिकरणपर स्पष्टीकरण देनेके लिए तन्त्रीको मिला १५ दिनोंका समय !


जनवरी २१, २०१९


सबरीमाला मंदिरके संरक्षक ‘त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड’ने सोमवार, २१ जनवरीको तन्त्री कंतारारू राजीवेरूको इस बारेमें स्पष्टीकरण देनेके लिए १५ दिवसका और समय दिया है कि भगवान अयप्पाके मन्दिरमें दो महिला श्रद्धालुओंके प्रवेशके पश्चात शुद्धिकरण अनुष्ठान क्यों किया गया ? बोर्डके एक अधिकारीने इस बातकी सूचना दी ।
‘टीडीबी’के अध्यक्ष ए. पद्मकुमारने मीडियाको बताया, ‘रविवारतक वह सबरीमालामें थे । अब वह कार्यसे मुक्त हैं और हो सकता है कि अपना उत्तर देनेसे पूर्व दूसरोंसे परामर्श लेना चाहें; इसलिए हमने उन्हें १५ दिवसका समय और दिया है ।’ पद्मकुमारने कहा, “सामान्यतया जब एक सामान्य शुद्धि अनुष्ठान किया जाता है तो तन्त्रीको ‘टीडीबी’से अनुमति लेनेकी आवश्यकता नहीं होती है; परन्तु दो जनवरीको जो हुआ वह सामान्य बात नहीं थी ।”

उल्लेखनीय है कि केरलके मुख्यमन्त्री पी. विजयनद्वारा इस बातकी पुष्टि करनेके पश्चात कि पचास वर्षसे अल्प आयुकी दो महिलाओं बिंदू अम्मीनी और कनक दुर्गाने सबरीमालामें प्रातः ३ बजकर ३० मिनटपर मंदिरमें दर्शन किए, प्रातः १० बजकर ३० मिनटके आसपास एक घंटेके लिए मंदिरको बंद कर दिया गया था । पद्मकुमारने कहा, ‘हमने उनसे (राजीवेरू) स्पष्टीकरण मांगा है कि ‘टीडीबी’की अनुमति क्यों नहीं ली गई ?’ ४ जनवरीको तन्त्रीको अधिसूचना देनेके पश्चात पद्मकुमारने कहा कि शुद्धि अनुष्ठान सर्वोच्च न्यायालयके निर्देशके विरुद्ध था, जिसने २८ सितम्बरको मंदिरके भीतर प्रत्येक आयु वर्गकी महिलाओंको प्रवेशकी अनुमति दी थी ।

 

“क्या न्यायालय अपने निर्णय तन्त्रियों व विद्वानोंद्वारा करवा सकता है ? यदि नहीं तो तन्त्रियोंके निर्णय न्यायालय कैसे ले सकते हैं ? शुद्धि कब करनी है, यह एक शास्त्रका ज्ञाता ही बता सकता है । एक वस्त्र सभीको समान रूपसे नहीं आता है; परन्तु बुद्धिवादियोंकी बुद्धि इतनी विकट है कि कबसे एक ही वस्त्र सभीको पहनानेपर लगे हुए है और यह सब धर्महीन लोकतन्त्र, न्याय व्यवस्था व शासनके मन्दिर अधिग्रहणके कारण ही है, अन्यथा पूजनीय तन्त्रीकी इतनी विडम्बना क्यों होती ?; अतः मन्दिरोंको अब शासकीय नियन्त्रणसे मुक्त कराना आवश्यक है, जो हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनापर ही सम्भव है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : नभाटा



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