सबरीमाला मन्दिरके पुजारीको प्रतिबन्धित (वर्जित) आयुकी स्त्रियोंके प्रवेशसे अशुद्ध हुए मन्दिरके शुद्धिकरणका स्पष्टीकरण देने हेतु, ऐसे लोगोंंको कहा जा रहा है, जिन्हें धर्मका ज्ञान नहीं है ! वस्तुत: यदि राज्यकर्ता सात्त्विक होते तो इस पुजारीको मन्दिरकी सात्त्विकता बनाए रखने हेतु उसकी स्तुति की जाती; किन्तु ‘अंधेर नगरी और चौपट राजा’वाली स्थितिमें तो यही होना है ! निधर्मी यह भूल जाते हैं कि विप्र (कर्मनिष्ठ ब्राह्मण), धेनु (देसी गौ माता), सुर (देव स्वरुप भक्तजन) और सन्तकी रक्षा हेतु ईश्वर अवतार लेते हैं ! और अवतार प्रकट होनेपर क्या करते हैं ?, यह तो सबको ज्ञात ही होगा !
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