जनवरी २४, २०१९
कल एक घोषणा हुई कि प्रियंका वाड्राको कांग्रेसका राष्ट्रीय महासचिव बना दिया गया है । यद्यपि ये कोई बडी बात नहीं थी; क्योंकि अनौपचारिक रूपसे वो पहले भी चुनाव प्रचार करती हीं थी । बस अब अन्तर इतना है कि पहले कोई उत्तरदायित्व नहीं लेती थी, अब लेना पडेगा । वैसे इसके भी अवसर कम ही आएंगे; क्योंकि कांग्रेसमें विजय राहुल गांधीकी होती है और पराजय पार्टी कार्यकर्ताओं की !
बडे-बडे समाचार माध्यमोंने इसे कांग्रेसके लिए महाक्रान्ति बताया । यद्यपि प्रियंका वाड्राके पास किसी प्रकारका कोई राजनैतिक अनुभव नहीं है । फिर भी देशके समाचार माध्यमोंने उन्हें सीधे मोदीके प्रतिद्वन्द्वीके रूपमें दिखाया ।
क्रांतिकारी समाचार माध्यम ‘आजतक’की पत्रकार १५ कांग्रेसियोंको एकत्रकर उन्हें प्रशिक्षण देकर, कांग्रेसके पक्षमें प्रचार करती हुई यह दिखानेका प्रयास कर रही है जैसे कि प्रियंका वाड्राके राजनीतिमें आगमनको अपार जनसमर्थन प्राप्त हो रहा है !
“क्या यह ही देशका चौथा स्तम्भ है ? धर्महीन लोकतन्त्रके तीन स्तम्भ तो ऐसे ही हिन्दुओंके लिए मृतप्राय है और अब यह चौथा स्तम्भ, जिसकी वास्तविक अनेकोंबार सबके समक्ष आ चुकी है । ऐसे धन व प्रसिद्धिके लोभमें आजके कुछ समाचार माध्यम किसी अभिनय करनेवाले नटसे अधिक नहीं होते हैं । कुछ समाचार माध्यम ऐसे हैं, जो स्पष्ट राष्ट्रद्रोहियोंका समर्थन करते हुए दिख जाते हैं, प्रसिद्धि हेतु किसी सामान्य समाचारको भी बडी घटना बनाकर दिखाते हैं । यदि देशका चौथा स्तम्भ ऐसा है तो यह देश पंगु हो चुका है तो अब ऐसे पंगु हुए राष्ट्रको पुनः इसका धरातल देनेके लिए धर्मनिष्ठ हिन्दू राष्ट्र ही एकमात्र पर्याय है; क्योंकि किसी भी राष्ट्रका एक ही स्तम्भ पर्याप्त है, वह है धर्म !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : आजतक
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