जनवरी २८, २०१९
कृषक मुक्ति संग्राम समितिके नेता अखिल गोगोईने रविवार, २७ जनवरीको कहा कि यदि असमके लोगोंको उचित सम्मान नहीं किया जाता है तो ‘हमें शासनको यह कहनेका साहस दिखाना चाहिए कि हम भारतमें नहीं रहनेपर विचार कर सकते हैं !’ प्रस्तावित विधेयकके विरोधमें असमके तिनसुकिया जनपदके पानीटोलामें एक रैलीको सम्बोधित करते हुए गोगोईने कहा, “यदि शासन हमें सम्मान देती है तो हम देशके साथ हैं; परन्तु यदि असमके स्थानीय लोगोंकी भावनाओंकी उपेक्षा की जाती है और विधेयकको पारित किया जाता है तो असमके प्रत्येक नागरिकको साहसके साथ कहना चाहिए कि वे भारतका अंग नहीं रहेंगे !”
प्रस्तावित विधेयकमें बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तानके गैर मुस्लिमोंको भारतीय नागरिकता देनेका प्रस्ताव है और कई दलों एवं संगठनोंने दावा किया है कि इसका संवेदनशील सीमावर्ती राज्यकी भौगोलिक स्थितिपर विपरीत असर पडेगा ।
उन्होंने कहा कि विधेयकके प्रावधानसे १९८५ की असम सन्धि समाप्त हो जाएगी, जिसमें मार्च १९७१ के पश्चात राज्यमें प्रवेश करनेवाले सभी अवैध प्रवासियोंको वापस भेजे जानेका प्रावधान है, चाहे वे किसी भी धर्मके हों ।
विधेयकके विरोधमें ७० संगठनोंके आंदोलनका नेतृत्व कर रहे गोगोईने कहा, “हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि यदि आवश्यकता और स्थिति बनती है तो असमको कहना चाहिए कि वे भारतके साथ रहनेके लिए सज्ज नहीं हैं !”
“समूचे असमको बांग्लादेशी धर्मान्धोंसे भरकर वहां अस्थिरता उत्पन्न कर दी और जब शासन कुछ पीडित हिन्दुओंको बसाना चाहती है तो इन निधर्मियोंको वेदना हो रही है ! अब सत्यमें समय आ गया है, जब कुछ लोगोंको भारतका अंग नहीं रहना चाहिए और शासनने इन्हें भारतसे त्वरित बाहर कर देना चाहिए; परन्तु ऐसे राष्ट्रद्रोहियोंके लिए कौन अपने द्वार खोलेगा ? शासन गोगोईपर राष्ट्रद्रोहिताका अभियोग लगाकर त्वरित दण्डका विधान करें और इनकी अन्तरिम इच्छाकी पूर्तिकर राष्ट्रसे बाहर करें; क्योंकि ऐसे लोग राष्ट्रमें रहकर विष ही उगलेंगें !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : न्यूज १८
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