जनवरी २८, २०१९
धर्मनिरपेक्षताकी ताली एक हाथसे नहीं बजती, ये सबको ज्ञात है; परन्तु एक विशेष पन्थका बडा वर्ग चाहता है कि यह ताली एक ही हाथसे बजेगी, तभी धर्मनिरपेक्षता मानी जाएगी ।
‘टीवी-९’के पत्रकार समील अब्बासने आज अमेठीके कालिका देवी मंदिरका दर्शन किया । दर्शन करनेके पश्चात उन्होंने ‘ट्विटर’पर चित्र डालते हुए लिखा, “चाहे स्मृति ईरानी हों या राहुल गांधी, अमेठीमें अमृत कुण्डपर बने इस एकमात्र कालिका देवी मंदिरमें मत्था टेकने सभी आते हैं । आज हमने भी यहां दर्शन किए । कहते हैं इस मंदिरमें मांगी गई इच्छा अवश्य पूर्ण होती है तो मैंने भी आज मांग लिया कि देशके भाईचारेको कभी किसीकी कुदृष्टि न लगे !”
उनके ‘ट्वीट’के उत्तरमें मुसलमानोंके कुछ ठेकेदारोंने इसपर उत्तर देना आरम्भ कर दिया । गद्दार अल्लामा इकबालकी चित्र लगाए मोजाहिदने लिखा, “ क्यों झूठी राष्ट्रवादी और धर्मनिरपेक्षता दिखानेके चक्करमें धर्मका व्यापार कर रहे हैं ? भले ही थोडी देरके लिए वाहवाही मिल जाएगी भक्तोंसे; परन्तु जब वास्तविक बात बोलोगे तब तुरन्त देशद्रोही बन जाओगे और पाकिस्तानी दलाल और ये धराका धरा रह जाएगा ।
आगे जियाउल हकने कहा, “आप मुस्लिम हो इस्लाममें शिर्क हराम (इस्लामके अनुसार अल्लाहके अतिरिक्त किसी औरको पूजनेका पाप) है, अल्लाहके अतिरिक्त हम मुस्लिम किसीकी पूजा नहीं कर सकते हैं ।” इन्होंने समीर अब्बासको जहन्नुममें (नर्कमें) जानेकी बात तक कह दी !
अब्दुल रहमानने कहा, “अल्लाहके अतिरिक्त किसी औरकी पूजा करना शिर्क (पाप) है महोदय ।”
“धर्मान्ध चाहते हैं कि हिन्दू मस्जिदोंमें जाए, दरगाहोंमें जाकर चादरें चढाएं, उनकी ईदकी सवैया खाए, परन्तु वे स्वयं ऐसा नहीं करते हैं ! भारत शासन दरगाहपर चादरें भेजता है; परन्तु जब वैष्णोंदेवीके नामपर सिक्के आते हैं तो वेदना होने लगती है ! ये कैसी धर्मनिरपेक्षता है, जो केवल हिन्दुओंको ही सिद्ध करनी पडती है और वस्तुतः यह धर्मनिरपेक्षता नहीं है वरन हिन्दुओंकी मूढता है, जो स्थान-स्थानपर फिरते हैं ! अब पत्रकार समील अब्बास स्वयं देखे और अनुभव करे कि कैसे देशमें शान्ति अथवा एकता रहेगी ?”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ईपोस्टमोर्टम
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