जनवरी २८, २०१९
उच्चतम न्यायालयने केन्द्रीय विद्यालयोंमें प्रातःकाल प्रार्थनामें हिन्दी और संस्कृतमें प्रार्थना करनेके विरुद्घ प्रविष्ट याचिकाकी सुनवाईके लिए संविधान पीठके पास भेजा दिया है । याचिकापर सुनवाई कर रही दो न्यायाधीशोंकी पीठने कहा है कि संविधान पीठ अब इस प्रकरणकी सुनवाई करेगी । साथ ही प्रकरण मुख्य न्यायाधीशके सामने भी रखा जाएगा ।
केन्द्रीय विद्यालयोंमें संस्कृत और हिन्दीमें प्रार्थना क्या हिन्दू धर्मका प्रचार है ? जबकि केन्द्र शासनद्वारा संचालित किसी भी संस्थानमें ऐसा नहीं होना चाहिए, इसपर न्यायालयमें दो न्यायाधीशोंकी पीठने कहा कि इस प्रकरणको संविधान पीठको सुनना चाहिए । पीठने कहा कि यह धार्मिक महत्वका प्रकरण है और उचित पीठके गठनके लिए प्रकरणको मुख्य न्यायाधीशके पास भेज दिया है । इससे पूर्व केन्द्रीय विद्यालयोंमें प्रातःकाल होनेवाली प्रार्थना क्या हिन्दुत्वको बढावा है ? न्यायालयने इसी प्रश्नको लेकर प्रविष्ट याचिकापर केन्द्रसे उत्तर मांगा था ।
याचिकामें संविधानके लेख /९२ के अनुसार ‘रिवाइज्ड एजुकेशन कोड ऑफ केंद्रीय विद्यालय संगठन’की वैधताको चुनौती दी गई है ।
‘लेख ९२’के अनुसार, “विद्यालयोंमें शिक्षाका आरम्भ प्रार्थनासे होगा । सभी बच्चे, अध्यापक और प्रधानाचार्य इस प्रार्थनामें भाग लेंगे ।” इसमें केन्द्रीय विद्यालयोंमें होनेवाली प्रार्थनाकी प्रक्रियाके बारेमें बताया गया है ।
“विचित्र है ‘असतो मा सदगमय’, ‘यतोस्धर्म: ततोस्जय:’ आदि उच्चारणसे धर्मान्धोंको पीडा होने लगी है । यह इस्लामिक राष्ट्र बननेकी प्रक्रियाका भाग है । पहले धर्मान्धोंको कोई परेशानी नहीं थी; क्योंकि संख्या अल्प थी, पहले भाईचारा था ! अब बढ गई है तो धीरे-धीरे आश्रित लोगोंको अब समानताका अधिकार चाहिए । समानताका अधिकार मिलनेके पश्चात अन्य धर्मस्थलों व प्रार्थनाओंको उसी धर्मनिरपेक्षताकी आडमें बन्द होना चाहिए ! उसके आगेका भाग है हिन्दुओंको उनके घरोंसे भगाकर इस्लामिक राज्य स्थापित करना चाहिए, जो कश्मीर, केरल आदि कुछ राज्य देख चुके हैं ! अब हिदुओंको निर्धारित करना है कि अन्य राज्योंमें देखना चाहते हैं अथवा नहीं ? केन्द्र इसमें हस्तक्षेपकर इस निराधार याचिकाको निरस्त करवाए; क्योंकि अभी यह हिन्दुस्तान है और जिसे संस्कृत प्रार्थनासे पीडा होती है, वह अपने बालकको विद्यालयसे उठाकर कुरान पढाए और सभी हिन्दू इसका मुखर होकर विरोध करें !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : फर्स्टपोस्ट
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