‘भाग – २६.४’में हमने लौकीके कुछ लाभोंके विषयमें जाना था । आज हम लौकीसे होनेवाले कुछ अन्य लाभोंके विषयमें जानेंगें –
* उच्च रक्तचापमें – नियमित एक गिलास लौकीका रस पीनेसे उच्च रक्तचापकी समस्यामें लाभ होता है । उच्च रक्तचापका विभिन्न प्रकारके हृदय सम्बन्धी समस्याओंसे सीधा सम्बन्ध है । लौकीका रस १५०-२०० मिलीग्राम प्रतिदिन पीनेसे रक्तमें रक्तवसाकी (कोलेस्ट्रॉलकी) मात्रा न्यून होती है और इससे उच्च रक्तचापकी समस्यामें लाभ मिलता है । लौकीके रसका यह लाभ लौकीमें विद्यमान ‘पोटैशियम’की अधिक मात्राके कारण है । पोटैशियम एक महत्त्वपूर्ण खनिज है, जो प्राकृतिक वाहिकाविस्फारकके (वासोडिलेटरके) रूपमें कार्य करता है । ‘वासोडिलेटर’ लघु रक्तवाहिकाओंको बडा करनेका कार्य करता है । यह हमारी रक्त वाहिकाओंको शिथिलकर (रिलैक्सकर) रक्त परिसंचरणमें सुधार करता है और इसप्रकार उच्च रक्तचापको नियन्त्रित करनेमें सहायता करता है । आहारमें अधिक सोडियमका उपभोग रक्तचापका कारण होता है और लौकीमें सोडियमका स्तर निम्न होता है; अतः इससे रक्तचाप नियन्त्रित होता है ।
* हृदयके लिए – भोजनमें तला हुआ, भारी खानेसे आज अत्यधिक लोगोंको हृदय रोगका संकट रहता है और कुछ लोगोंमें यह आनुवांशिक रहता है । हृदयको स्वस्थ रखनेके लिए अन्य क्षार युक्त फलों और शाकोंकी भांति लौकीका रस भी पी सकते हैं । लौकीमें जल, ‘विटामिन-सी’, ‘विटामिन-के’ और ‘कैल्शियम’ प्रचुर मात्रामें होते हैं । यह रक्तवसाके स्तरको न्यूनकर हृदयको स्वस्थ बनाए रखता है । इसमें रक्तवसाकी मात्रा शून्य होती है तथा ‘विटामिन-सी’ और ऑक्सीकरणरोधी यौगिकोंसे (एंटी-ऑक्सीडेंटसे) परिपूर्ण लौकी हृदयके लिए अत्यधिक लाभप्रद शाक है ।
* मधुमेहमें – मधुमेहके रोगियोंके लिए लौकीका सेवन एक प्रभावकारी उपाय है । मधुमेहमें खाली पेट लौकीका सेवन करना उत्तम होता है । यदि चाहें तो लौकीका रस पी सकते हैं । इस रोगका सीधा सम्बन्ध शरीरमें अम्लके (एसिडके) बढे स्तरसे है । लौकी क्षारीय होनेके कारण शरीरमें अम्लके स्तरको न्यून करती है, जिससे इस रोगमें लाभ मिलता है ।
* यकृत (लिवर) रोगोंमें – अपौष्टिक भोजन अथवा मद्यपान करनेवाले लोगोंके यकृतमें शीघ्र सूजन आ जाती है । ऐसेमें यदि लौकीके रसमें, गिलोयका रस, धनिया, नींबू, अदरकका रस, थोडी हल्दी अथवा आम्बा हल्दीका रस और काला नमक मिलाकर पीते हैं तो इससे अवश्य ही लाभ मिलता है । यह यकृतकी सारी गन्दगीको बाहर कर देता है । इससे ‘हेपेटाइटिस’, ‘फैटी लिवर’, ‘लिवर सिरोसिस’, ‘एल्कोहॉलिक लिवर’ रोग और ‘लिवर कर्करोग’ जैसे रोग भी ठीक होते हैं ।
* कर्करोगमें – कर्करोगसे ग्रसित व्यक्तिके शरीरमें ये जीवाणु अत्यधिक मात्रामें बनने लगते हैं और शरीरकी स्व-प्रतिरक्षित (ऑटोइम्यून) व्यवस्था बन्द हो जाती है । उपरोक्त लौकीका रस (गिलोय, अदरक, हल्दी, नींबू, काला नमक आदि मिलाकर) कर्करोगके बढे हुए जीवाणुओंको नष्ट करता है और स्व-प्रतिरक्षित प्रणालीको आरम्भ करता है । यह यकृत और कर्करोगको ठीक करनेमें आपके घरका अचूक वैद्य है । इस रसको एकसे दो बार लें, भोजन कमसे कम या एक समय ही करें, अधिकसे अधिक ऋतुके फल और कच्चे शाक जैसे गाजर, मूली, चुकन्दर आदिका सेवन करें । यह तीव्रतासे रोगको नष्ट कर देगा ।
* अनिद्रा दूर करे – यदि आपको रातको नींद नहीं आती है तो लौकी इसमें लाभप्रद सिद्ध हो सकती है । लौकीके रसके साथ थोडे तिलके तेलको मिलाकर उसका सेवन करनेसे अनिद्राकी समस्या भी दूर हो जाती है ।
अगले भागमें (भाग – २६.६में) हम लौकी व इसके रससे होनेवाले कुछ अन्य लाभों व प्रयोगमें सावधानियोंके विषयमें बताएंगें।
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