मांसाहार क्यों न करें ? (भाग – ७)


‘पेड-पौधे’ मिट्टी, प्रकाश और हवासे अपना भोजन आप ही बना लेते हैं; परन्तु ‘पशु’ और ‘मनुष्य’ अपने भोजन हेतु या जीवित रहने हेतु वनस्पति या दूसरे जीव-जंतुओंपर निर्भर रहते हैं । प्रकृतिने दो प्रकारके पशु बनाए हैं, शाकाहारी और मांसाहारी । शाकाहारी भोजनको चबा-चबाकर खाते हैं; इसलिए इनके दांत मोटे और समतल होते हैं, जिनके मध्य भोजन पिस जाता है । वहीं, मांसाहारी शिकारको चीड-फाडकर खाते हैं और इस कार्य हेतु प्रकृतिने उनके चार बडे-बडे नुकीले दांत बनाए हैं । मांसाहारी पशुके नाखून भी शाकाहारी जानवरोंकी अपेक्षा बडे, मुडे हुए और नुकीले होते हैं । साथ ही, उनके जबडे बहुत सशक्त होतें हैं और मुख भी उनके सिरकी अपेक्षा अधिक खुल सकता है, मांसाहारी पशु समान मनुष्यमें कोई भी शारीरिक संरचना नहीं है; इससे सिद्ध होता है कि प्रकृतिने मनुष्यकी संरचना एक शाकाहारी जीवके समान की है ! प्रकृति विरुद्ध जानेसे हम रोग और शोक दोनोंके अधिकारी होते हैं, हमारा हिन्दू धर्म प्रकृतिके सिद्धान्तोंको सहज स्वीकार करता है; इसलिए हिन्दू धर्ममें शाकाहारको प्रधानता दी गई है ! आज भी भारतमें हिन्दू धर्मके इतने पतनके पश्चात भी किसी भी देशसे भारतकी यदि मात्र हिन्दुओंकी जनसंख्याको आधार लेकर मांसाहार भक्षणकी तुलना की जाए तो वह नगण्य समान ही होगा !



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution