जनवरी २९, २०१९
भारतीय राजनीतिमें नेताओंकी तुलना भगवानोंसे करनेकी परम्परासी बन गई है । राष्ट्रीय स्तरपर प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीसे लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधीतक और क्षेत्रीय राजनीतिमें प्रवेश करनेवाले तेजस्वी तक, सभीके कार्यकर्ता अपने नेताकी तुलना भगवानोंसे कर रहे हैं !
इसीको आगे बढाते हुए अब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधीको बिहारके कार्यकर्ताओंने भगवान रामका रूप दे दिया है । बिहारकी राजधानी पटनामें कुछ ऐसे ललक (पोस्टर) देखे गए हैं, जिनमें राहुलको भगवान रामकी भांति दिखाया गया है, जो संसद भवनके बाहर खडे हैं !
पटनामें लगे इस फलकमें सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और प्रियंका गांधीके भी चित्र हैं । इस पोस्टरमें प्रियंका गांधीकी तुलना किसी भगवानसे भले ही न की गई हो; परन्तु जिस दिवस उन्होंने सक्रिय राजनीतिमें प्रवेश करते हुए पूर्वी उत्तर प्रदेशकी कमान सम्भाली थी, उसी दिन उनके समर्थकोंने उनकी तुलना देवी दुर्गासे कर दी थी ।
वैसे बिहार शासनमें मन्त्री रह चुके तेज प्रताप यादव तो स्वयंको ही श्री कृष्णका रूप बता चुके हैं । उन्होंने स्वयंको कृष्णके रुपमें रथपर बैठे हुएका चित्र गत दिवसोंमें पोस्ट किया था ।
राहुल गांधीकी पहली बार किसी भगवानसे तुलना नहीं की गई है । पहले भी उनका नाम कई भगवानोंके साथ जोडा जा चुका है । मध्य प्रदेश विधानसभा मतदानके पूर्व कांग्रेस पार्टीके फलकमें उन्हें भगवान शिवके भक्तके रूपमें प्रदर्शित किया गया था ।
मध्य प्रदेशमें कांग्रेस पार्टी डेढ दशकका राजनीतिक सूखा समाप्तकर सत्तामें आ गई थी । अब दलके कार्यकर्ता सम्भवतः इसी आधारपर लोकसभा मतदानकी तैयारी कर रहे हों । वैसे भी अब लोकसभा मतदानमें अधिक समय शेष नहीं है ।
“तामसिक वृत्तिको धारण किए, देवताओंके अस्तित्वको नकार श्रीरामको काल्पनिक पात्र बतानेवाले, गौमांस भक्षण करनेवाले निधर्मी राजनेता, सत्वगुण प्रधान देवोंके चरणोंकी धूल समान भी नहीं है और ये और इनके अन्ध भक्त इन्हें तारनहार बताकर ईश्वरकी संज्ञा देते हैं और हिन्दू होते हुए भी देवी-देवताओंकी विडम्बना करनेका महापाप करते हैं और ऐसा करनेसे नेतागण उन्हें रोकते भी नहीं है; क्योंकि अहंकार इतना ऊपर है कि इसका उन्हें भान ही नहीं होता है ! आगामी हिन्दू राष्ट्रमें सभी नेता धर्मनिष्ठ होंगें, जिससे ऐसे दुष्कृत्य नहीं होंगें ।” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : फर्स्टपोस्ट
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