आयुर्वेद अपनाएं स्वस्थ रहें (भाग – २६.६)


‘भाग – २६.५’में हमने लौकीके कुछ लाभोंके विषयमें जाना था । आज हम लौकीसे होनेवाले कुछ अन्य लाभ व प्रयोगमें सावधानियोंके विषयमें जानेंगें –
लौकीके अन्य लाभ –
१. लौकीका रस व शाक क्षारीय गुणोंसे युक्त होनेके कारण उदरकी अम्लता, अपच और अन्य आंतोंके रोगोंमें अत्यधिक लाभप्रद है ।
२. लौकीका रस, इसमें विद्यमान खनिजोंके कारण, अस्थियोंको (हड्डियोंको) बलशाली बनाता है ।
३. लौकीका रस शरीरसे यूरिया व अन्य विषाक्त पदार्थोंको बाहर करता है, जिससे गठिया आदिमें लाभ मिलता है ।  
४. लौकीका रस पीनेसे या लौकीके और तुलसीके पत्तोंको पीसकर मस्सोंपर लगानेसे बवासीर रोगमें लाभ मिलता है ।
५. लौकीको उबालकर खानेसे नकसीरमें लाभ मिलता है ।
६. मासिकधर्ममें (पीरियड्समें) एक गिलास लौकीके रसका सेवन करनेसे अत्यधिक रक्तस्राव (हेवी ब्लीडिंग) नहीं होता है ।
७. जो पथरीकी समस्यासे जूझ रहे हैं, उनके लिए लौकीका सेवन अत्यधिक लाभप्रद है ।
सावधानियां – जैसे लौकीके लाभ अधिक हैं, वैसे ही इसका सेवन करना शरीरके लिए हानिकारक भी हो सकता है । इसके सेवनमें निम्न सावधानियां आवश्यक हैं –
१. लौकीका रस पीते समय इस बातका ध्यान रखना आवश्यक है कि इसमें किसी अन्य फल आदिका मिश्रण नहीं होना चाहिए ।
२. लौकीका रस बनानेके पश्चात और पहले उसे एकबार चखकर अवश्य देखें । यदि रस तिक्त (कडवा) हुआ तो उसका सेवन न करें; क्योंकि यह कई रोग उत्पन्न कर सकता है । इसप्रकारका लौकीका रस गर्भवती महिलाओंके लिए भी विषकारी होता है और इससे गर्भपात भी हो सकता है ।
३. खाली पेट लौकीके रसका सेवन करनेसे वायु और जी मिचलाने जैसी समस्याएं हो सकती हैं; परन्तु आवश्यक नहीं कि यह सभीको हो ।
४. जिन लोगोंको शीतप्रकोपकी (जुकाम या नजला) समस्या हो, वे लौकीका रस शीत ऋतुमें न पिएं, पीना ही हो तो सोंठ और कालीमिर्च डालकर सेवन करें ।
५. आरम्भमें लौकीका रस पीनेसे कोष्ठबद्धता (कब्ज) और उदरकी कोई समस्या हो सकती है; क्योंकि लौकीका रस पेटसे विकारोंको बाहर करता है, यदि आपके साथ इसप्रकारके कोई लक्षण हों तो घबराएं नहीं, कुछ समयके पश्चात ये लक्षण स्वतः ही ठीक हो जाएंगें ।


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