मांसाहार क्यों न करें ? (भाग – ८)


हमारे द्रष्टा सन्तोंने तो अपनी सूक्ष्म इन्द्रियोंकी सहायतासे मांसाहारके कारण होनेवाले मात्र शारीरिक ही नहीं अपितु मानसिक और आध्यात्मिक, तीनों ही स्तरके हानिको सत्त्व, रज और तमके सूत्रोंमें लाखों वर्ष पूर्व ही बता दिया था; किन्तु अब तो पाश्चात्य देश, जहां वे दिवसका प्रथम आहार भी मांसाहारसे आरम्भ करते हैं, वे भी अपने आधुनिक वैज्ञानिक शोधोंसे इसकी हानि बताने लगे हैं । चूंकि मैकाले शिक्षित हिन्दू, पाश्चात्योंके शास्त्रको अधिक प्रमाणित मानते हैं, अतः विदेशी शोधकर्ताओंके विचार भी इस लेख श्रृंखलामें बतानेका प्रयास करेंगें, जिससे उन्हें यह विषय और प्रामाणिक लगे । यथा –
* स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयार्क, बफैलोमें किए गए शोधसे यह प्रकाशमें आया कि अमरीकामें प्रत्येक वर्ष ४७००० से भी अधिक ऐसे बच्चे जन्म लेते हैं, जिन्हें माता-पिताके मांसाहारी होनेके कारण कई रोग जन्मसे ही लगे होते हैं और ये बच्चे बडे होनेपर भी पूर्णत: स्वस्थ नहीं हो पाते । हमारे यहां कहा जाता है कि सात्त्विक और तेजस्वी सन्तान हेतु गर्भकालमें मांसाहारी माता-पिताने भी ऐसे आहार नहींं करने चाहिए और न ही इनकी ओर देखना चाहिए !
*१९८५ के नोबेल पुरस्कार विजेता, अमरीकी डा. माइकल एस. ब्राउन व डा. जोसेफ एल गोल्डस्टीनने यह प्रमाणित किया है कि हृदय रोगसे बचावके लिए रक्तवसा (कोलेस्ट्रॉल) नामक तत्त्वको जमनेसे रोकना अति आवश्यक है, यह तत्त्व वनस्पतिमें नहींके बराबर होता है । अण्डोंमें सबसे अधिक व मांस, अण्डों(इस वाक्यके आरम्भमें एक बार ‘अण्डोंमें’ आ चुका है) व पशुओंसे प्राप्त वसामें अत्यधिक मात्रामें होता है । जो व्यक्ति मांस या अण्डे खाते हैं, उनके शरीरमें ‘रिस्पटरो’की संख्यामें कमी हो जाती है, जिससे रक्तमें रक्तवसाकी (कोलेस्ट्रॉलकी) मात्रा अधिक हो जाती है । इससे हृदय रोग, गुर्देके रोग एवं पथरी जैसे रोगोंको बढावा मिलता है ।
हमारे देशकी निधर्मी व्यवस्थामें अब तो विद्यालयोंमें बच्चोंको अण्डे खिलानेका प्रावधान किया जाने लगा है ! अर्थात उन्हें साधना और धर्म विरहित शिक्षासे तो निधर्मी बनाया ही जा रहा है, साथ ही उनमें मांसाहारका संस्कार डालकर रोगी भी बनानेका नियोजन किया जा रहा है !
सबसे अधिक दुःखकी बात यह है कि हिन्दुओंके पवित्र स्थान एवं धार्मिक उत्सवोंमें अण्डों और चिकनके ठेले आपको सहज ही दिखाई देते हैं !
  पाश्चात्योंका अनुकरण करनेवाले भारतीयोंको यह बोध हो कि विदेशियोंको भी ज्ञात होने लगा है कि मांसाहार करनेसे अत्यधिक हानियां होती हैं; अतः अगले कुछ दिवस आपको इस विषयमें हम जानकारी देते रहेंगे !



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