जनवरी ३१ २०१९
हिन्दुस्तानमें मुसलमानोंके सबसे बडे सामाजिक संगठन ‘जमीअत उलमा-ए-हिंद’के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनीने मदरसोंको आतंकवादका केन्द्र बताए जानेपर विरोध प्रकट करते हुए गुरुवार, ३१ जनवरीको कहा कि मुसलमान उत्तम चरित्रका प्रदर्शन करके मदरसोंपर लगे दागोंको धो डालें । मौलाना मदनीने यहां ‘जमीयत’के एक कार्यक्रममें कहा कि आज देशमें मदरसोंपर भिन्न-भिन्न आरोप लगाकर उनपर लक्ष्य साधा जा रहा हैं, जोकि अत्यन्त निन्दनीय और चिन्तनीय है ।
उन्होंने कहा कि देशकी स्वतन्त्रतासे लेकर उसे संवारनेमें मदरसोंका बहुत बडा योगदान रहा है और उन्हें आतंकवादका केन्द्र बताया जाना उनका अपमान है ।
जमीअत अध्यक्षने कहा कि मदरसोंके प्रबन्धनको चाहिए कि वह प्रशासनिक अधिकारियोंको अपने यहां न्योता देकर बुलाए और उन्हें अपनी कार्यप्रणालीके बारेमें बताएं, ताकि समाजमें यह व्यापक सन्देश दिया जा सके कि मदरसे राष्ट्र निर्माणमें किसप्रकार योगदान कर रहे हैं ?
मौलाना मदनीने कहा कि हिन्दुस्तान एक कठिन समयसे गुजर रहा है । भारतीय जनता पार्टीने मुसलमानोंके साथ-साथ संविधानकी भी अत्यधिक हानि की है ।
उन्होंने कहा कि कांग्रेसने मुसलमानोंको हानि पहुंचाई है; परन्तु उससे संविधानको कभी कोई संकट नहीं उत्पन्न हुआ ।
“मदनीजीको सम्भवतः इतिहासका ज्ञान नहीं तो बताना चाहेंगें कि कांग्रेसके समयमें सिक्खोंका नरसंहार हुआ, आपातकाल लगाया गया, अनेकोनेक आतंकी संगठन बनें, विस्फोट हुए, कश्मीरी पण्डितोंका नरसंहार किया गया, देशमें अनेक उपद्रव हुए; परन्तु आश्चर्य है कि मदनीको आज संविधान संकटमें दिखता है और तो और आतंकका बीज बोनेवाले मदरसे इन्हें पवित्र दिखते हैं ! इससे स्पष्ट है कि इन लोगोंका न ही संविधानसे कुछ लेना-देना है, नही देशसे; इनका उद्देश्य केवल और केवल इस्लामसे है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जी न्यूज
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