‘भाग – २७.१’में हमने करेला, इसकी प्रकृति व इसकी आयुर्वेदिक व होम्योपैथिक औषधीय प्रयोगके विषयमें जाना था, आज हम इसकी सेवन विधि, करेलेके रस आदिके विषयमें जानेंगें ।
सेवन विधि –
१. करेलेका शाक बनाया जा सकता है ।
२. करेलेका रस बनाकर पिया जा सकता है ।
३. करेलेका चूर्ण बनाकर लिया जा सकता है ।
करेलेका शाक बनानेकी योग्य विधि – कई लोग करेलेको अत्यधिक तलकर शाक बनाते हैं, ताकि इसका कडवापन नष्ट हो जाए; परन्तु स्मरण रखें कि कडवापन नष्ट होनेसे हम शाकके समस्त गुणोंको नष्ट कर देते हैं । प्रकृतिने जिस वस्तुकी जैसी प्रकृति बनाई है, उसे उसके मूल रूपमें ही सेवन करें । प्रायः लोग करेलेके बाहरके छिलके व बीजोंको भी पूर्ण रूपसे हटा देते हैं और जो शेष रहता है, उसका शाक बनाते हैं, ऐसा कदापि न करें ! यदि करेला पका हुआ है तो उसके बीज निकाले जा सकते हैं और यदि ज्ञात है कि करेला किसी अच्छे स्थानसे नहीं आया है तो एक पात्रमें थोडा जल डालकर उसमें करेलेको कुछ समय उबाल लें । कडवाहट कुछ अल्प करनेके लिए इसे कुछ देर नमकके जलमें भिगोया जा सकता है; परन्तु इसे अधिक देरतक नमकके जलमें भीगोकर न रखें, तदोपरान्त इसे ऐसे ही या अत्यधिक अल्प मात्रामें सरसोंके तेलमें थोडा भून सकते हैं । हल्का लाल होनेके पश्चात इसकी कडवाहट अल्प हो जाएगी । इसके पश्चात इसमें औषधीय मसाले भरकर बना सकते हैं और सेवन कर सकते हैं; परन्तु कडवाहट इसका गुण है, यह स्मरण रखें !
करेलेका रस बनानेकी विधि – सबसे पहले छोटे करेले लें; क्योंकि छोटे करेले अधिक गुणकारी होते हैं, तदोपरान्त इसके टुकडे कर लें और इन टुकडोंको २० मिनटके लिए एक गिलास जलमें फूलनेके लिए छोड दें । फूलनेके पश्चात इन करेलेके टुकडोंको जल सहित पीस लें, साथमें एक टमाटर और एक खीरा मिलाया जा सकता है, इससे यह अधिक गुणकारी हो जाता है । अब इसका रस निकाल लें व इसे छानकर इसका सेवन करें ।
ध्यान दें कि पथरीके रोगी टमाटर न मिलाएं और इस करेलेके रसका एकबारमें ५०-१०० मिलीलीटर ही सेवन करें, इससे अधिक न लें ! इस रसको दिनमें २ बार (प्रातःकाल और सन्ध्यामें) ही लें और रात्रिमें इसका सेवन न करें ! इसमें स्वादानुसार नींबू, सेंधा नमक और काली मिर्च डालकर पीया जा सकता है ।
करेलेका चूर्ण – करेलेको काटकर सुखा लें । इसपर धूल आदि न गिरने दें । इसे सुखाकर पिस लें व एक पात्रमें भरें । यह चूर्ण अनेक रोगोंके लिए लिया जा सकता है ।
करेलेके पत्ते, पुष्प आदि सभी गुणकारी हैं । अगले ‘भाग २७.३’में हम करेले एवं इसके पत्तों आदिसे होनेवाले कुछ लाभोंके विषयमें जानेंगें ।
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