गौमांसभक्षी काटजूका पुनः सनातनके प्रति विष वमन, राम कोई भगवान नहीं, गायको माता कहनेवालोंकी बुद्धिमें भरा है गोबर !!


जनवरी ३, २०१९


उच्चतम न्यायालयके पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजूका कहना है कि राम कोई भगवान नहीं थे, वे साधारण व्यक्ति थे । इसके साथ ही उन्‍होंने गायको माता कहनेपर भी आपत्ति प्रकट की । उनका कहना था कि एक पशु किसी मानवकी मां कैसे हो सकती है ?

उत्तराखण्डकी राजधानी देहरादूनमें आयोजित एक कार्यक्रममें भाग लेने आए मार्कंडेय काटजूने कहा कि राम भगवान नहीं, वरन एक साधारण व्यक्ति थे । वाल्‍मीकिद्वारा रचित मूल संस्‍कृत रामायणमें उन्‍हें वैसा ही बताया गया है । वहीं गायको माता कहे जानेपर आपत्ति प्रकट करते हुए काटजूने कहा कि गाय भी घोडे और कुत्तेकी भांति एक पशु है । ऐसेमें जो लोग गायको माता कहते हैं, उनके बुद्धिमें गोबर भरा है !!

काटजूने कहा कि ये सब आगामी लोकसभा मतदानमें वोट पानेके लिए राजनीति की जा रही है । आप संस्कृतमें वाल्मीकि रामायण उठाइए, उसमें कहीं नहीं हैकि राम भगवान हैं !

 

“काटजू बातें संस्कृत रामायणकी कर रहे हैं; परन्तु उन्हें तो सामान्य ज्ञानतक नहीं है ! हम नहीं जानते कि काटजू किस संस्कृतिसे हैं; परन्तु भारतीय संस्कृतिमें किसी भी स्त्री शक्तिको मां या भगिनीके रूपमें ही देखा जाता है और फिर यदि वह स्त्री शक्ति कल्याणकारी हो तो उसे ‘मां’ ही कहा जाता है, जैसे गंगा आदि देव नदियां । काटजू हो सकता है गौमांस अथवा मद्य पीकर बडे हुए हो; परन्तु भारतमें आज भी बालक गौदुग्ध पीकर ही बडा होता है ! उसके मक्खन, घीसे ही बलशाली बनता है । उसके गोमय, गोमूत्रकी असीम शक्तिको आज विज्ञान भी मानता है तो क्या कृतज्ञता व्यक्त करनेके लिए उसे मां नहीं तो क्या कहेंगें ? मर्यादित जीवन जीकर समस्त असुरोंका संहारकर धराका भार उतारनेवाले धनुषधारी श्रीरामको भगवान नहीं तो क्या कहेंगें ? आप जैसे विज्ञानहीन, तर्कहीन व्यक्ति तकको समस्तजन ‘’उच्चतम न्यायालयके पूर्व न्यायाधीश काटजू’’ कहते हैं तो समस्त गुणोंकी खान गायको ‘मां’ कहना तो अत्यधिक अल्प है ! ”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : न्यूज १८



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