मुस्लिम महिलाओंकी राजनीतिक दलोंसे खतना सदृश कुप्रथा समाप्त करनेकी मांग !!


जनवरी ६, २०१९


बोहरा समुदायकी महिलाओंके एक समूहने बुधवार, ६ फरवरीको राजनीतिक दलोंसे आग्रह किया कि वे समुदायमें प्रचलित महिलाओंके खतनाकी प्रथाको समाप्त करनेके लिए पग उठाएं और इस मुद्देको अपने चुनावी घोषणापत्रोंमें सम्मिलित करें ।

‘महिला खतनाके विरुद्घ ‘जीरो टॉलरेंस’के अन्तर्राष्ट्रीय दिवस’पर महिलाओंने यह मांग की है । प्रत्येक वर्ष यह दिन छह फरवरीको मनाया जाता है । संयुक्त राष्ट्रने इस प्रथा/परम्पराको मानवाधिकार हननकी श्रेणीमें रखा है ।

महिला खतनाकी भुक्तभोगी महिलाओंके निजी संगठन ‘वीस्पीकआउट’की ओरसे दिए वक्तव्यमें कहा गया है, “ सभी राजनीतिक दल महिला अधिकारों और कन्या शिशुकी जीवन रक्षाकी बात करते हैं । हम उनसे पूछना चाहते हैं कि महिला खतनापर उनका रवैया क्या है ? क्या वे इसे समाप्त करेंगें ? क्या वह इसपर प्रतिबन्धका समर्थन करेंगे ? यदि हां, वह हमारा वोट पानेके अधिकारी है ।”

वक्तव्यमें कहा गया है कि चूंकि इस वर्ष लोकसभा चुनाव होने हैं, ऐसेमें यह मुद्दा राजनीतिक दलोंके घोषणापत्रका अंग होना चाहिए ।

महिला खतना पीडित और ‘वीस्पीकआउट’की सदस्य मासूमा रानाल्वीका कहना है कि वे चाहती हैं कि भारतके सभी नेता बोहरा महिलाओंकी विनती सुनें और महिला खतना समाप्त करनेके लिए पग उठाएं ।

वह कहती है कि राजनीतिक दलोंको कन्याओंके सम्मानकी रक्षाके प्रति और संवेदनशील और उत्तरदायी होनेकी आवश्यकता है । महिला खतना उनकी योजनाओंका अंग होना चाहिए ।

बता दें कि इस्लामकी कई प्रथाओंमें महिला और पुरूषोंका ‘खतना’ होता है । इसमें बचपनमें ही उनके यौनिक अंगके अगले भागको काट दिया जाता है । इसे कौमार्यसे जोडकर देखा जाता है । महिला खतनाके कारण प्रत्येक वर्ष कई बच्चियोंके प्राण भी चले जाते हैं ।

 

“जन्म लेते ही महिलाका खतना करना अर्थात उसे एक बच्चा उत्पन्न करनेकी मशीन समझ ६-७ महिलाओंके साथ विवाह करनेवाले धर्मान्धोंके लिए सत्यनिष्ठ होनेका विचार करना । दिन-रात मुस्लिम-मुस्लिम जपनेवाले कांग्रेसी संस्कृतिके राजनीतिक दल खतना जैसी क्रूर व अवैज्ञानिक परम्पराको मूक समर्थन देते आए हैं । राहुल गांधी नारीवादकी बातें करते हैं; परन्तु वास्तवमें जब कृत्यकी बारी आती है तो वे दल मुस्लिम पुरुषोंकी ही बातें करते हैं, जैसे तीन तलाकमें समूचे देशने देखा । कांग्रेसी आदि स्वघोषित शिक्षित नेता कपिल सिब्बल आदि सब न्यायालयमें मुसलमानी निराधार परम्पराओंके समर्थनमें बोलते हैं; परन्तु हिन्दुओंकी पूर्णतया वैज्ञानिक परम्पराको ये निधर्मी निराधार मानते हैं । इससे ही इनकी तामसिक बुद्धिका बोध होता है । भारत शासन साहस दिखाकर इस अवैज्ञानिक, निराधार कुप्रथाका अन्त करें ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

स्रोत : टाइम्सनाउ



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