जनवरी ६, २०१९
अयोध्यामें भव्य राम मन्दिरके निर्माणके प्रकरणपर विश्व हिन्दू परिषदकी ओरसे आंदोलन किया जाता रहा है; परन्तु, लोकसभा मतदानसे ठीक पूर्व वीएचपीने अगले चार माहतक राम मन्दिरको लेकर सभी आन्दोलनोंको स्थगित कर दिया है !
अयोध्यासे लेकर दिल्लीतक और फिर प्रयागराजके महाकुम्भतक चली वीएचपीकी धर्म संसदमें भव्य राम मन्दिरका निर्माण करनेके लिए प्रस्ताव पारित होता रहा, आन्दोलन तीव्र करनेकी बात कही जाती रही, यहांतक कि न्यायालयके आदेशकी प्रतीक्षा किए बिना मन्दिरपर संसदसे विधान बनानेकी मांग की जाती रही; परन्तु इन सबके मध्य वीएचपीका आन्दोलन स्थगित करनेका निर्णय अचम्भित करनेवाला है ।
वीएचपीकी ओरसे अन्तर्राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव सुरेन्द्र जैनके अनुसार, “लोकसभा मतदानको देखते हुए ४ माहतक राम मन्दिर निर्माणके लिए कोई आन्दोलन नहीं होगा !” उन्होंने कहा, “मतदानके चलते ४ माहके लिए राम मन्दिर के आंदोलनपर विराम लगाया गया है, ऐसेमें कोई उंगली नहीं उठा पाएगा कि हम किसी विशेष दलको लाभ पहुंचानेका प्रयास करते हैं ।”
वीएचपीके नूतन रवैयेपर फर्स्टपोस्टसे वार्तामें वीएचपी प्रवक्ता विजय शंकर तिवारी कहते हैं, “प्रायः हमपर यह आरोप लगता है कि ये राजनीति करनेके लिए ऐसा कर रहे हैं; अतः हमने इस आंदोलनको अभी ४ माहतक स्थगति करनेका निर्णय किया है । केवल ६ अप्रैलको ही एक दिन वीएचपीके कार्यकर्ता देश भरमें अपने आस-पासके सभी मंदिरोंमें ‘श्री राम जयराम जय-जय राम’का १३ कोटि जप करेंगे ।”
“वीएचपीका मतदानसे ५-६ माह पूर्व राम मन्दिरके प्रकरणको उठाना, अयोध्यामें, संगममें साधु- सन्यासियोंके साथ बडे-बडे नामके जैसे महासम्मेलन आदि करना, बिना विधानके मन्दिर बनानेकी बातें करना, शासनको ललकारना, प्रतिदान भारतकी जनताको राम मन्दिरकी नूतन तिथि देना, लाखों हिन्दुओंको अयोध्या बुलाकर वापस भेज देना ये सब क्या हिन्दुओंको मूर्ख बनानेके लिए था ? पांच वर्षोंसे शासन चल रहा है और राम मन्दिर अब स्मरण हो रहा है । जबतक हिन्दू राजनीतिक दलोंमें विभाजित होकर ध्वज उठाएंगें, ऐसे ही उन्हें बार-बार अपमानित होना ही पडेगा । ये लोकसभा मतदानतक मौन रहेंगें; तदोपरान्त शासनमें आते ही तुष्टिकरण व विकासमेंं लिप्त होकर कहेंगें कि यह हमारी प्राथमिकता नहीं है ! यह हम नहीं स्वयं भाजपाके नेताओंने ही कहा है । स्पष्ट है कि राम मन्दिर शासनके लिए न प्राथमिकता था और न है; अतः सभी हिन्दुओंको अब केवल हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना हेतु ही कार्यरण होना चाहिए । अब मन्दिरका निर्माण धर्मराज्यकी स्थापनापर ही सम्भव है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : फर्स्ट पोस्ट
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